रिवायत के नाम पर जान का रिस्क: जमीन पर लेटते हैं लोग और ऊपर से गुजरती हैं बेकाबू गायें

इस रिवायत को देखने के लिए दूर-दूर से लोग भी पहुंचते हैं. सबसे पहले गोवर्धन और गौरी पूजा की जाती है. जबकि गांव की सभी गायों को नहा धुलाकर उन्हें सजाया जाता है.

रिवायत के नाम पर जान का रिस्क: जमीन पर लेटते हैं लोग और ऊपर से गुजरती हैं बेकाबू गायें
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उज्जैनः देश भर में दीपावली अलग-अलग रिवायतों के साथ मनाई जाती हैं. उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील के भिडावद गांव में भी एक ऐसी रिवायत सालों से चली आ रही है जिसे देखकर लोग कांप उठते हैं. दरअसल यहां ज़मीन पर लोगों को लिटाकर उनके ऊपर से गायों को दौड़ाया जाता है. ऐसा यह लोग खुद करवाते हैं ताकि उनकी मन्नतें पूरी हो सकें. यह रिवायत दीपावली के दूसरे दिन निभाई जाती है.

इस रिवायत को देखने के लिए दूर-दूर से लोग भी पहुंचते हैं. सबसे पहले गोवर्धन और गौरी पूजा की जाती है. जबकि गांव की सभी गायों को नहा धुलाकर उन्हें सजाया जाता है. इसके बाद गांव के लोग चौराहे पर जमा हो जाते हैं. जहां से मन्नतें मांगने वाले लोगों का एक जुलूस पूरे गांव में निकाला जाता है. जुलूस खत्म होने के बाद गांव के अहम मार्ग पर इन मन्नतें मांगने वाले लोगों को मुंह की तरफ से ज़मीन पर लिटाया जाता है. उसके बाद गांव की सैकड़ों गायों को छोड़ दिया जाता है. ये गाये दौड़ते हुए जमीन पर लेटे हुए लोगों के ऊपर से गुजरती है. शाम के वक्त लोग गांव के गौरी मंदिर पहुंचकर जमकर नाचते हैं.

भिडावद के गांव वालों का कहना है कि यह रिवायत सालों से उनके गांव में चली आ रही है. जिसे उनके बुजुर्ग उन्हें विरासत के तौर में सौंपकर गए हैं. इसलिए वे भी इस रिवायत पर अमल करते आ रहे हैं. माना जाता है कि गाय में 33 करोड़ देवदातों का वास रहता है. ऐसे में गायों को ऊपर से दौड़ाने पर लोगों की मन्नतें पूरी होती है.

इस साल भी गांव के लोगों ने मन्नते मांगी हैं, मन्नत मांगने वाले लोग पूरे पांच दिन तक मंदिर में रहते हैं. आज भी शाम के वक्त यह रिवायत होगी. जहां मन्नतें मांगने वाले लोगों के ऊपर से गाय दौड़ती हुई जाएगी. जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटती है.

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