Turkey Boycott: केंद्र सरकार ने तुर्की की ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी का परमिट लाइसेंस रद्द करने के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि पछताने से बेहतर, एहतियात बरतना है. जानें कोर्ट का फैसला ...
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Turkey Boycott: केंद्र सरकार ने तुर्की 16 मई को तुर्की की कार्गो सेवा कंपनी का परमिट लाइसेंस रद्द कर दिया था. कंपनी ने केंद्र के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसपर कोर्ट ने कहा है कि पछताने से बेहतर है एहतियात बरतना. हालांकि फिल्हाल इस मामले पर कोर्ट ने कोई आदेश जारी नहीं दिया है.
दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर 19 मई को सुनवाई हुई, जिसमें फिल्हाल कोई फैसला नहीं दिया गया है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा, "पछताने से बेहतर है एहतियात बरतना." इस मामले की अगली सुनवाई 21 मई को होगी. केंद्र ने तुर्की की ग्राउंड हैंडलिंग और कार्गो सेवा कंपनी Çelebi Airport Services India का परमिट लाइसेंस रद्द कर दिया है.
बिना नोटिस किया परमिट रद्द
केंद्र सरकार का कहना है कि उन्होंने यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया है. सॉलिसिटर जनरल मेहता का कहना है कि सिविल एविएशन और नेशनल सिक्योरिटी के मामलों में रेशियो का कोई नियम लागू नहीं होता. उन्होंने केंद्र के फैसले का पक्ष लेते हुए कहा, "दुश्मन दस बार कोशिश कर सकता है और एक बार सफल हो सकता है; देश को हर बार कामयाब होना है." वहीं कंपनी के तरफ से पेश हुए वकील ने कहा है कि Çelebi हिन्दुस्तान में 17 सालों से बिना किसी परेशानी के काम कर रही है. साथ ही यह भी बताया है कि केंद्र ने कंपनी का परमिट रद्द करने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया है.
राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत फैसला
मेहता का कहना है कि कंपनी में काम कर रहे कर्मचारी को एयरपोर्ट और एयरप्लेन से जुड़े सभी बातों की जानकारी होती है. ऐसे में Çelebi कंपनी को यह काम देना सही नहीं होगा. उन्होंने बतया कि किसी भी कंपनी का परमिट लाइसेंस रद्द करना सुरक्षा से जुड़ा हुआ है. एयरक्राफ्ट सिक्योरिटी नियमों के मुताबिक खतरे की स्थिति में लाइसेंस रद्द करने की इजाजत है.
Çelebi Airport Services India ने बताया है कि भले ही कंपनी के शेयरधारक तुर्की में रजिस्टर्ड है. लेकिन, कंपनी को विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त कंपनियों के जरिए चलाया जाता है.