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नई दिल्ली: हिंदुस्तान और चीन कशीदगी पर आज पार्लियामेंट में जवाब देते हुए वज़ीरे दिफा (Defence Minister) राजनाथ सिंह चीन ने अभी भी हिंदुस्तान की जमीन पर अभी भी नाजायज़ कब्ज़ा किया हुआ है. अप्रैल महीने से चीन ने बॉर्डर पर फौजियों और आर्म्स में इज़ाफा किया है. पेंगोंग से लेकर कई जगहों पर चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश की.
राजनाथ सिंह ने कहा है कि मैं हाउस को आगाह कराना चाहता हूं कि चीन, हिंदुस्तान की लगभग 38,000 स्क्वायर किलोमीटर ज़मीन का नाजायज़ कब्जा लद्दाख में किए हुए है. इसके अलावा, 1963 में एक नामनिहाद बाउंडरी एग्रीमेंट के तहत, पाकिस्तान ने PoK की 5180 स्क्वायर किलोमीटर हिंदुस्तानी जमीन गैर कानूनी तौर पर चीन को सौंप दी है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि भले ही चीन ने हिंदुस्तान में घुसपैठ की कोशिश की है लेकिन हमारे जांबाज़ फौजियों ने उनकी तमाम कोशिशों को नाकाम बना दिया है. उन्होने आगे कहा कि हमारी रिवायत रही है कि इस हाउस में जब भी मुल्क के सामने कोई बड़ी चुनौती आई है तो इस हाउस ने हिंदुस्तानी फौज की अज़्म के तईं अपनी पूरी एकता के साथ भरोसा दिखाया है.
इसके अलावा उन्होंने फौज पर यकीन का इज़हार करते हुए कहा कि मैं आपको यह यकीन दिलाना चाहता हूं कि हमारे आर्म्ड फोर्सेस के जवानों का जोश और हौसला बुलंद है.
वज़ीरे दिफा ने आगे कहा कि हिंदुस्तान का मानना है कि, दो तरफा तअल्लुकात को बनाया जा सकता है और तथा साथ ही बॉर्डर मुद्दे के हल के बारे में चर्चा भी की जा सकती है लेकिन LAC पर अमन किसी भी तरह की संगीन सूरतेहाल का दो तरफा रिश्तों पर यकीनी तौर से असर पड़ेगा.
राजनाथ सिंह ने बताया कि अप्रैल महीने से मशरिकी (पूर्वी) लद्दाख की बॉर्डर पर चीन की फौज की तादाद तथा उनके गोलाबारूद में इज़ाफा देखा गया.
मई महीने की शुरुआत में चीन ने गलवान वादी में हमारी फौज के पेट्रोलिंग पैटर्न में खलल शुरू किया जिसकी वजह से फेसऑफ की सूरते हाल पैदा हुई.
हमने चीन को राजनयिक और फौजी ज़रिए से यह आगाह करा दिया कि इस तरह की सरगरमियां status quo को एकतरफा बदलने का कोशिश हैं. यह भी साफ कर दिया गया कि ये कोशिश हमें किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है.
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