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Imambara News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुसैनाबाद ट्रस्ट के कामकाज को लेकर बड़ा विवाद हो रहा है. मरकजी चांद कमेटी के सदर मौलाना सैफ अब्बास और दिलदार अली गुफरान मॉब फाउंडेशन ने ट्रस्ट में चल रहे कथित भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच की मांग की है. मौलाना सैफ अब्बास ने इस संबंध में लखनऊ की डीएम विशाख अय्यर को एक पत्र सौंपा है, जिसमें पांच मुख्य मांगें रखी गई हैं.
मौलाना सैफ अब्बास ने कहा, "उन्होंने डीएम से मुलाकात कर साफ कहा है कि हुसैनाबाद ट्रस्ट के अंदर वित्तीय गड़बड़ियां गंभीर स्तर पर हो रही हैं. अगर जांच स्थानीय स्तर के अधिकारियों से कराई गई तो निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि कई अधिकारी खुद इस गड़बड़ी का हिस्सा हैं. इसलिए ट्रस्ट की आय-व्यय की पारदर्शिता और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए सीबीआई जांच अनिवार्य है.
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के पैसों के इस्तेमाल में गड़बड़ियां हो रही हैं, इसलिए इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी से होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके. मौलाना सैफ अब्बास ने यह भी कहा कि नींबू पार्क के पास सड़क चौड़ी करने से जिन शिया लोगों की दुकानें या जगहें प्रभावित हुई हैं, उन्हें नई दुकानें बनाकर दी जाएं. उन्होंने प्रशासन से अपील की कि लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतें, छोटा और बड़ा इमामबाड़ा की तुरंत मरम्मत कराई जाए, ताकि उनकी सुंदरता और धार्मिक महत्व बना रहे.
मौलाना ने यह भी कहा कि इमामबाड़ों में आने वाले कुछ लोग अश्लील रील या वीडियो बनाते हैं, जिससे धार्मिक भावना आहत होती है. इसलिए ऐसे वीडियो बनाने पर तुरंत रोक लगाई जाए. साथ ही उन्होंने मांग की कि डालीबाग गार वाली कर्बला में शिया समुदाय के लोगों को 300-300 वर्ग फीट की दुकानें दी जाएं, ताकि उन्हें रोजगार और सम्मान दोनों मिल सके.
मौलाना सैफ अब्बास ने यह भी कहा कि हुसैनाबाद ट्रस्ट से हर साल जो आय होती है, उसका 50% हिस्सा गरीब लड़कियों की शादी और विधवाओं की मदद के लिए खर्च किया जाना चाहिए. उनका कहना है कि यह ट्रस्ट केवल धार्मिक धरोहरों की देखरेख के लिए नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए भी जिम्मेदार है. उन्होंने यह भी मांग की कि लखनऊ के छोटे और बड़े इमामबाड़ों को पर्यटक स्थलों के बजाय धार्मिक स्थलों के रूप में सम्मान दिया जाए. मौलाना ने कहा, "हम चाहते हैं कि इन जगहों की पवित्रता बनी रहे और यहां कोई भी अशोभनीय गतिविधि न हो."