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चेन्नईः दक्षिणी तमिलनाडु के थेनी में आठ दलित परिवारों के चालीस लोगों ने इस्लाम कबूल कर ( 8 Dalit Families embraced Islam ) लिया है. थेनी जिले के बोदिनायकनूर शहर के डोंबिचेरी गांव में (Dombicheri village in Bodinayakanur town in Theni district) कुछ दिन पहले धर्मांतरण हुआ और इस्लामिक पुजारियों ने धर्मांतरण को अंजाम दिया. संयोग से, बोदिनायकनूर तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक के वरिष्ठ नेता ओ पनीरसेल्वम का निर्वाचन क्षेत्र (Bodinayakanur is the constituency of the former Chief Minister of Tamil Nadu and senior leader of the AIADMK, O. Panneerselvam) है. धर्मांतरित लोगों ने इल्जाम लगाया कि उच्च जाति के हिंदू उन पर नियमित रूप से हमला करते (upper caste atrocities) हैं और हर छह महीने में एक बार डोंबुचेरी गांव में दलितों के खिलाफ हिंसा की कोई न कोई घटना सामने आती है.
दुकान से चाय-काॅफी लेने पर मनाही
मजहब बदलने वाले लोगों ने कहा कि उन पर ऊंची जाति के हिंदुओं द्वारा लगातार हमला किया गया, जो उन्हें निचली जाति की स्थिति का हवाला देते हुए स्थानीय रेस्तरां और रास्ते में चाय की दुकानों से चाय या कॉफी पीने की अनुमति नहीं देते हैं. उन्होंने इल्जाम लगाया है कि वहां व्यक्ति को पीटा गया, दलित लड़कियों को छेड़ा गया और सड़कों पर चलते समय उन पर भद्दे कमेंट्स और इशारे किए गए.
सवर्णों की गली में चलने पर है पाबंदी
रहीमा (32) जो पहले वीरालक्ष्मी थीं, उन्होंने कहा, ’’हमें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा है. हमें छेड़ा जा रहा है, पीटा जा रहा है, अपमान किया जा रहा है और उसी गली में नहीं चलने दिया जा रहा है जहां उच्च जाति के हिंदू रहते हैं. हमारे माता-पिता और दादा-दादी को इस अपमान का सामना करना पड़ा और हमने फैसला किया कि बहुत हो गया. अब हम मुसलमान हैं और हमें यहां कोई सीमांकन नहीं मिलता है.
मोटरसाइकिल खरीदने पर हुई थी पिटाई
रहीमा के पति मोहम्मद इस्माइल, जो पहले कलाइकनन थे ने कहा कि नवंबर 2021 में दीपावली समारोह के दौरान ऊंची जाति के पुरुषों द्वारा उनकी पिटाई की गई थी और उन्होंने घटना के बाद इस्लाम में परिवर्तित होने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि ऊंची जाति के लोगों ने मोटरसाइकिल खरीदने पर उन्हें बेरहमी से पीटा और कहा कि तमिलनाडु के गांवों में दलित दुख की जिंदगी जी रहे हैं.
सवर्ण हिंदुओं द्वारा दलितों पर अत्याचार से बदलते हैं लोग धर्म
तमिल पुलीगल पार्टी के थेनी उत्तर सचिव मोहम्मद अली जिन्ना ने बताया कि वह पहले वरिमुथु थे और पंद्रह साल पहले इस्लाम में परिवर्तित हो गए थे. उन्होंने कहा कि धर्मातरण का कारण कुछ और नहीं बल्कि सवर्ण हिंदुओं द्वारा दलितों पर अत्याचार है. हमें उन सड़कों पर चलने की भी अनुमति नहीं थी, जिनसे वे चलते हैं. पंद्रह वर्षो से, मुझे इस्लाम में परिवर्तित होने के बाद सम्मान मिल रहा है.
हिंदू संगठन ने लगाया लालच देकर धर्म बदलने का इल्जाम
हालांकि, हिंदू मुन्नानी ने धर्मांतरण के पीछे उच्च जाति के अत्याचारों होने से इनकार किया और कहा कि सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) और इसकी शाखा पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) जैसी इस्लामी पार्टियां लोगों को लालच देकर उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए मजबूर कर रही हैं. विरोध करने वालों को धमकी दी जाती है. अर्जुन ने कहा, हम थेनी जिले के डोम्बुचेरी गांव के लोगों तक पहुंच रहे हैं. हम उन्हें इसके खिलाफ मनाएंगे और कुछ दिनों में सब ठीक हो जाएगा.
पहले भी सामूहिक तौर पर हो चुका है धर्म परिवर्तन
गौरतलब है कि तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले के मीनाक्षीपुरम गांव में, 180 दलित पल्लावर परिवारों ने 19 फरवरी, 1981 को इस्लाम धर्म अपना लिया था, जिससे पूरे देश में एक बड़ा हंगामा हुआ था और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी भारत में निष्क्रिय अस्पृश्यता पर रिपोर्ट की थी. इस्लाम अपनाने वालों ने इल्जाम लगाया था कि बहुसंख्यक थेवर समुदाय ने उन पर हमला किया और उच्च जाति के हिंदुओं की पीड़ा से बचने के लिए धर्मांतरण उनका आखिरी उपाय था.
कई लोग वापस लौट जाते हैं अपने मूल धर्म में
हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि 1991 तक धर्मांतरण के दस साल बाद 180 परिवारों में से 1100 में से लगभग 900 लोग वादों की पूर्ति की कमी का हवाला देते हुए हिंदू धर्म में लौट आए थे. इस्लाम में धर्म परिवर्तन का नया विवाद मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा प्लस टू की एक छात्रा की आत्महत्या की मौत की सीबीआई जांच के आदेश के बाद से विवादों में बना हुआ है, जिसमें जबरन धर्म परिवर्तन का इल्जाम लगाया गया था. इस मामले पर बीजेपी और हिंदू मुन्नानी खुलकर सामने आए थे.
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