Uttar Pradesh News: संभल शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर जफर अली को चंदौसी सिविल कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इंकार कर दिया है. प्रशासन ने पिछले साल जामा मस्जिद सर्वे के दौर हुई हिंसा में भड़काऊ भूमिका निभाने का इल्जाम लगाया है. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.
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Uttar Pradesh News: संभल शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर और वकील जफर अली को संभल प्रशासन ने गुजिश्ता 23 मार्च को गिरफ्तार कर लिया था. इस केस की सुनवाई आज यानी 27 मार्च को चौंदौसी सिविल कोर्ट में हुई है. जफर अली के वकील ने कोर्ट में उनके जमान के लिए याचिका दायर किया था. लेकिन कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान जमानत देने से इंकार कर दिया है. प्रशासन ने जफर अली पर इल्जाम लगाया है कि वह पिछले साल संभल जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुए हिंसा में भड़काऊ भूमिका निभाया था, जिससे जुड़े कई पुख्ता सबूत पुलिस के हाथ लगी है. यह प्रशासन की और से की जा रही है.
जफर के वकील ने कही ये बात
संभल हिंसा मामले में गठीत जांच कमेटी वकील जफर अली को इससे पहले कई बार पूछताछ के लिए बुला चुकी है. लेकिन इस बार उन्हें सर्वे के दौरान हिंसा भड़काने के मामले में गिरफ्तार कर लिया गाया है. जफर अली के अंतरिम जमानत से जुडे़ याचिका पर चंदौसी सिविल कोर्ट के के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज निर्भय नरायन ने आज सुनवाई की है, और जमानत देने से इंकार कर दिया है. जफर के तरफ से कोर्ट में पेश होने वाले एक वकील ने कहा कि जफर अली बिल्कुल निर्दोष हैं, और उन्हें कोर्ट से जमानत मिल जाएगी.
प्रशासन के वकील ने कोर्ट से कर दी ये अपील
वहीं, इस मामले में प्रशासन के तरफ से कोर्ट में पेश होने वाले हरिओम प्रकाश सैनी वकील ने कहा कि जफर अली के खिलाफ पुख्ता सबूत है, जिसे कोर्ट में पेश किया गया है. वकील ने कहा कि वह कोर्ट से जफर अली को जमानत न देने की अपील की है. कोर्ट में पेश सबूत और प्रशासन की अपील के बाद जस्टिस निर्भय राय ने जफर अली को अंतरिम जमानत देने से इंकार कर दिया है, और इस केस से जुड़ी नियमित पीआईएल पर 2 अप्रैल को सुनवाई की डेट दी है.
मस्जिद सर्वे के दौरान हुई थी हिंसा
पिछले साल नवंबर के महीने में शाही जामा मस्जिद सर्वे के दौरान पुलिस और मुसलमानों के बीच हिंसा भड़क गया था. इस हिंसा में लगभग 5 मुस्लिम नौजवानों की मौत हो गई थी, वहीं कई नौजवान और पुलिस वाले घायल भी हुए थे. इस घटना के बाद इलाके में तनाव बढ़ गाय था, और प्रशासन पर गोली चलाने का इल्जाम भी लगे थे, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने और इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया था. हालांकि अब तक जांच कमेटी की रिपोर्ट नहीं आई है.