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Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में मौजूद मशहूर दारुल उलूम देवबंद मदरसा में छात्रों के मोबाईल चलाने पर बैन लगा दिया गया है. यह फैसला छात्रों की पढ़ाई और इमतिहान को ध्यान में रखते हुए देवबंध मदरसा इंतजामिया के तरफ से लिया गया है. यह फैसला नए दाखिले के बाद लिया गया है, और दारुल उलूम देवबंद में मौजू सभी नए और पुराने छात्रों पर लागू किया गया है. इस फैसले को सही बताते हुए देवबंद मदरसा के तरफ से कई दलील दिए गए हैं.
दारुल उलूम का कहना है कि वह हमेशा से अपने छात्रों को बाहरी ग़ैर-ज़रूरी चीज़ों से दूर रखता है, और इल्म, दीनी तालीम पर ज़ोर देता आया है. इस नीति के तहत मोबाइल फ़ोन, खासतौर पर स्मार्टफोन्स, को एक बड़ी रुकावट माना जा रहा है जो छात्रों की तालीमी तरक़्क़ी में रुकावट बन सकते हैं.
दारुल उलूम होस्टल प्रभारी मुफ़्ती अशरफ अब्बास की ओर से चस्पा कराए गए ऐलान में छात्रों को मल्टीमीडिया ( एंड्राइड) मोबाइल का इस्तेमाल न करने को कहा गया है, साथ ही कहा गया कि यदि तलाशी के दौरान किसी छात्र के पास से मल्टीमीडिया ( एंड्राइड) मोबाइल बरामद होता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मशहूर देवबंदी आलिम मौलाना क़ारी इसहाक़ गोरा ने इंतजामिया के इस कदम की तारीफ करते हुए कहा कि दारुल उलूम का मक़सद है कि यहां पढ़ने वाले बच्चे किताबों से ताल्लुक़ मजबूत करें और अपना ज़्यादा से ज़्यादा वक्त दीनी और तालीमी तरबियत में लगाएं.
मौलाना गोरा ने सभी स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स से अपील की है कि वे दारुल उलूम की इस हिदायत को संजीदगी से लें और इसका मुकम्मल पालन करें, ताकि तालीम का माहौल कायम रह सके जिसके लिए दवबंद मदरसा जाना जाता है.