)
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की ऐतिहासिक कलेक्ट्रेट मस्जिद के विध्वंस के बाद पैदा हुए हालात को लेकर जमीयत उलमा-ए-हिंद के सद्र मौलाना महमूद मदनी की हिदायत पर जमीयत उलमा-ए-उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधिमंडल सहारनपुर पहुंचा था. मंगलवार को जमीयत उलमा-ए-हिंद का एक उच्चस्तरीय केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के रहनुमाई में सहारनपुर पहुंचा और मस्जिद से संबंधित कानूनी, प्रशासनिक और सामाजिक हालात का बारीकी से जायजा लिया.
प्रतिनिधिमंडल ने शहर के जिम्मेदार लोगों, मुकदमे से कानूनी विशेषज्ञों, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों और जमीयत उलमा के मकामी पदाधिकारियों से मुलाकात की और आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया. प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व सांसद हाजी फज़लुर्रहमान, वर्तमान सांसद इमरान मसूद, मस्जिद की ज़मीन से जुड़े स्वर्गीय याकूब खान के पोते फिरोज खान और शाह खान, एडवोकेट नौशाद और मुकदमे के एडवोकेट तनवीर अहमद समेत दीगर संबंधित लोगों से भी चर्चा की.
इन बैठकों में मस्जिद के विध्वंस, जिला प्रशासन के रवैये और उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विस्तार से विचार किया गया. चर्चा के दौरान यह गंभीर फैक्ट सामने आया कि जिस दस्तावेज को फैसले का आधार बताया जा रहा है, उसके संबंध में यह सवाल उठता है कि वह दस्तावेज न्यायिक रिकॉर्ड में विधिवत दर्ज था या नहीं? इसके अलावा जिस रिकॉर्ड में ‘सरकार-ए-हिंद’ से संबंधित जिक्र का हवाला दिया जा रहा है, उसके ज़मीन से वास्तविक स्वामित्व संबंध को लेकर भी गंभीर कानूनी सवाल मौजूद हैं. इन सभी पहलुओं की दस्तावेजी और कानूनी जांच की जा रही है.
मामला केवल किसी एक धर्म या समुदाय का नहीं
जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि मामले से संबंधित दस्तावेज और साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं और उन्हें जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के सामने पेश किया जाएगा. उनकी सलाह और कानूनी विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद अगला कदम उठाया जाएगा.
उन्होंने मस्जिद के विध्वंस पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह जल्दबाजी में कार्रवाई की गई, उससे शहर के लोगों और न्यायप्रिय नागरिकों में गंभीर बेचैनी पैदा हुई है. प्रभावित पक्ष को अपने बचाव और संवैधानिक अधिकारों के इस्तेमाल का अवसर दिए बिना अचानक बुलडोजर चला देना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता. अदालत से संपर्क करने का अधिकार महज औपचारिक सुविधा नहीं, बल्कि संविधान की मूल भावना और संवैधानिक न्याय का बुनियादी हिस्सा है.
उन्होंने कहा कि सहारनपुर में जो घटना हुई है, उससे पूरा शहर दुखी और चिंतित है. यह मामला केवल किसी एक धर्म या समुदाय का नहीं है, बल्कि कानून के शासन, संवैधानिक अधिकारों और न्याय के मूल सिद्धांतों से हुआ है.
इंसाफ के दोहरे पैमाने हमेशा तबाही का रास्ता खोलते हैं
इस मामले में जमियत उलमा-ए-हिंद के अरशद मदनी गुट के सद्र अरशद मदनी ने कहा है कि इंसाफ के दोहरे पैमाने हमेशा तबाही (विनाश) का रास्ता खोलते हैं. सरकारें डर, ज़ुल्म और भेदभाव से नहीं, बल्कि न्याय और इंसाफ, समानता और जनता के विश्वास से चलती और तरक्की करती हैं. सांप्रदायिकता और धर्म के आधार पर नफ़रत को बढ़ावा देना किसी भी देश के लिए बेहद ख़तरनाक है. यह न सिर्फ सामाजिक ताने-बाने को कमज़ोर करता है, बल्कि अमन, तरक्की और राष्ट्रीय एकता को भी नुकसान पहुँचाता है. इसके बावजूद मौजूदा हालात से मायूस होने की कोई ज़रूरत नहीं है. आज जो हालात हैं, वे हमेशा ऐसे नहीं रहेंगे. हर रात के बाद सुबह ज़रूर आती है, और वह दिन भी आएगा जब अमन, भाईचारे, प्रेम और न्याय का सूरज उगेगा और नफ़रत, भेदभाव और सांप्रदायिकता का अंधेरा छंट जाएगा.
हम एक जीवित (ज़िंदा) क़ौम हैं, और जीवित क़ौमें हालात के रहमो-करम पर नहीं रहतीं,वे अपने चरित्र, हौसले और अमल से हालात का रुख़ बदल देती हैं.
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) का सरकार पर हमला
सहारनपुर में 115 साल पुरानी मस्जिद को तोड़े जाने के मामले को लेकर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया यानी SDPI ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं. SDPI के यूपी अध्यक्ष हारून साहिल ने आरोप लगाया कि मस्जिद कमेटी को अदालत में अपनी बात रखने और आगे की कानूनी कार्रवाई का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया. पार्टी ने इस कार्रवाई को लेकर सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े किए हैं. SDPI के यूपी अध्यक्ष हारून साहिल ने दावा किया कि सहारनपुर में 5 सितंबर की सुबह करीब 3 बजे 115 साल पुरानी मस्जिद को तोड़ दिया गया. मस्जिद कमेटी को हाईकोर्ट जाने का अवसर दिए बिना कार्रवाई की गई हारून साहिल ने कहा कि इस मामले में प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया के बाद भी मस्जिद कमेटी को आगे कानूनी राहत लेने का मौका मिलना चाहिए था. धार्मिक स्थलों और मजारों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है.