Dehradun News: उत्तर प्रदेश के एक मुस्लिम नाई पर उत्तराखंड में गैरकानूनी तरीके से अपने पूरे परिवार के सदस्यों का निवास प्रमाण पत्र बनवाने का इल्जाम है. इस घटना के बाद हिंदूवादी संगठन के लोग प्रशासन से मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. पूरी जानकारी के लिए नीचे स्क्रॉल करें.
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Dehradun News: देश का संविधान देश के हर एक नागरिक को ये हक़ देता है कि वो देश के जिस हिस्से में चाहे वहां बस सकते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश के एक नाई को उत्तराखंड में अपना आवासीय दस्तावेज़ बनवाना मंहगा पड़ गया है. पूरा भगवा ब्रिगेड उसके खिलाफ खड़ा हो गया है.
उत्तराखंड के देहरादून उत्तर प्रदेश का एक मुस्लिम परिवार काम करने आया था. लम्बे अरसे तक वहां रहने के बाद उसने वहां स्थानीय निवास प्रमाण पत्र बनवा लिया है. इसकी जानकारी जब लोकल हिन्दू संगठन को मिली तो गांव के लोग और हिंदूवादी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है, और प्रशासन से इस मामले की तुरंत जांच करने की अपील की है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला देहरादून के कालसी तहसील क्षेत्र का है. यहां उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का रहने वाला एक मुस्लिम परिवार कुछ सालों से देहरादून में रह रहा था, और यहां नाई का काम करता था. हिंदूवादी संगठनों का दावा है कि इस मुस्लिम परिवार ने गैरकानूनी तरीके से अपने पूरे परिवार के सदस्यों की वहां की स्थाई प्रमाण पत्र बनवा लिया है. हिंदूवादी संगठनों के विरोध के बाद आरोपी मुस्लिम परिवार फिर से उत्तर प्रेदश लौट गया है. वहीं, गांववालों और हिंदूवादी संगठन के लोगों ने दुकान मालिक को फरमान सुनाते हुए कहाँ है की 7 दिन के भीतर अपनी दुकान से इस तरह के लोगों को निकाल दो, वरना गाँववालों को 1 लाख रुपया जुर्माना देना पड़ेगा.
नाई का नाम अकरम बताया जा रहा है. हिंदूवादी संगठनों का दावा है कि मुल्जिम और उसके परिवारवालों की फर्जी दस्तावेज वहीं के तहसील प्रशासन ने तैयार किए है. हालांकि तहसील प्रशासन इस माले पर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है.
गौरतलब है कि पिछले साल मार्च के महीने में उत्तराखंड के गोहाटी से लगभग 91 मुस्लिम दुकानदारों को वहां के व्यापारिक संघ ने शहर छोड़ने का फरमान सुनाया था. इन में से ज्यादातर दूसेरे राज्य के थे. दरअसल, उत्तर प्रेदश के बरेली का एक मुस्लिम कारोबारी पर आरोप था कि वह गोहाटी में एक नाबालिग बच्ची को पहले अगवा किया, फिर रेप कर दिया था.