Uttarakhand Madrasa News: उत्तराखंड सरकार ने राज्य द्वारा संचालित मदरसा बोर्ड को खत्म कर दिया है. इस फैसले के बाद पूरे राज्य में मदरसों के मैनेजमेंट और अल्पसंख्यक शिक्षा के भविष्य को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं.
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Uttarakhand News: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को खत्म कर दिया गया है. अब उत्तराखंड में मौजूद मदरसों में स्कूल खोले जाएंगे. राज्यपाल की मंज़ूरी मिलने के बाद सरकार ने राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है. सरकार की तरफ से एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया है. जारी अधिसूचना के मुताबिक, प्राधिकरण में चेयरमैन समेत कुल 11 नियुक्तियां की गई हैं. डॉ. सुरजीत सिंह गांधी को चेयरमैन नियुक्त किया गया है.
स्पेशल सेक्रेटरी डॉ. पराग मधुकर ढाकाटे ने बताया कि पिछले विधानसभा सत्र में मदरसा बोर्ड को खत्म करने वाला बिल पास हो गया था. 1 जुलाई से अल्पसंख्यक संस्थानों को राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत लाया जाएगा. उनकी मान्यता प्रक्रिया उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड द्वारा संभाली जाएगी.
कौन-कौन होगा बोर्ड का सदस्य
डॉ. पराग ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुसार, डॉ. सुरजीत सिंह गांधी को बोर्ड का चेयरमैन और प्रोफेसर राकेश जैन, प्रोफेसर गुरमीत सिंह, डॉ. सैयद अली, प्रोफेसर पेमा तेनज़िन, डॉ. एल्बा मैड्रिल, प्रोफेसर रोबिना अमन, राजेंद्र बिष्ट और रिटायर्ड IAS अधिकारी चंद्रशेखर भट्ट को सदस्य नियुक्त किया गया है. इसके अलावा, स्कूल शिक्षा महानिदेशक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान निदेशक और अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक भी अथॉरिटी के सदस्य होंगे.
सीएम ने किया सबकुछ क्लियर
वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "हमने पहले ही तय कर लिया था कि समान काम के लिए समान वेतन होना चाहिए. सरकारी आदेश भी कल जारी कर दिया गया था. रास्ता साफ है, कोई अस्पष्टता नहीं है. अब समान काम के लिए समान वेतन लागू किया जाएगा. मैं सभी को बधाई देता हूं. हमने सभी के लिए समान शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अल्पसंख्यक शिक्षा में सुधार के लिए बिल पेश किया था."
अब पढ़ाया जाएगा साइंस और मैथ
उत्तराखंड सरकार के इस फैसले के बाद मदरसों में पढ़ने वाले छात्र अब सिर्फ धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहेंग. नए नियम के तहत मदरसों में अब साइंस, गणित, सोशल साइंस और कंप्यूटर साइंस जैसे मॉडर्न विषय पढ़ाए जाएंगे. सरकार के अनुसार, राज्य के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को अब उत्तराखंड स्कूल शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेनी होगी. सरकार का कहना है कि इस कदम से बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाएगा और उनके भविष्य के अवसर बेहतर होंगे. सरकार ने यह भी दावा किया कि इस कदम से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की कथित तुष्टीकरण की राजनीति खत्म हो गई है.