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वाराणसी: शहनाई का नाम सुनते ही ख्यालों में उतर जाने वाले शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का काशी से बहुत गहरा रिश्ता है. कहा यह भी जाता है कि उनके सुरों की धार काशी में बनी थी और शायद यही वजह है कि वो ताउम्र काशी को नहीं छोड़ पाए लेकिन अब उनकी अगली नस्ल को शायद ये मंज़ूर नहीं है. तभी उनके काशी वाले घर को लेकर पारिवारिक तनाज़ा पैदा हो गया है.
मकान बिस्मिल्लाह खां के बेटे मरहूम मेहताब के नाम है और इस वक्त ये बहुत ही खस्ता हालत में है. जिस वजह से मकान को तुड़वा कर उसकी मरम्मत कराई जा रहा थी. इस पर परिवार के कुछ मेंबरों को ऐतराज़ होने के बाद तय किया गया कि मकान बिल्डर को दे दिया जाए और खां साहब की विरासत को एक मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में तब्दील कर दिया जाए.
बिस्मिल्लाह खान की गोद ली गई बेटी सोमा घोष ने जब मकान के तोड़े जाने की खबर सुनी तो इसकी इत्तेला डीएम वाराणसी को दी. उन्होंने मांग भी रखी कि खां साहब के मकान को हुकूमद तहफ्फुज़ मुहैया कराए और उसे अजायबघर (संग्रहालय) के तौर पर तैयार करे. फिलहाल वाराणसी बीडीए ने मकान का नक्शा पास होने तक तामीर को रोक दिया है.
हिंदुस्तान के सबसे आला शहरी अवार्ड (भारत रत्न) याफ्ता बिस्मिल्लाह खां का मकान 527 स्क्वायर फुट में है जो कि इस वक्त काफी खस्ता हाल है. बिस्मिल्लाह खां के 5 लड़के और 4 लड़कियां हैं. उनमें अक्सर उस्ताद साहब की जायदाद को लेकर तनाज़े की खबरें आती रही हैं. अब मकान पर हुए तनाज़े के बाद परिवार के मेंबरों का कहना है कि मकान खस्ता हालात में था इस वजह से मकान की मरम्मत के लिए इसको तोड़ा जा रहा है, न कि मकान किसी बिल्डर को दिया गया है.
इससे पहले भी उनके पुश्तैनी घर से उस्ताद बिस्मिल्ला खां की 5 शहनाइयां भी चोरी हो चुकी हैं. हालांकि वाराणसी पुलिस ने मामले में खुलासा किया था कि शहनाइयां उनके पोते ने ही चुराई थीं. जिसके बाद सिर्फ 1 लकड़ी की ही शहनाई मिल सकी थी. बाकी 4 चांदी की शहनाइयां गलवाई जा चुकी थीं.
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