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नई दिल्ली: केंद्र सरकार के वक्फ पोर्टल UMEED यानी (The Unified Waqf Management, Empowerment, Efficiency, and Development Act, 1995) को लेकर कई दिनों से देश में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है. ये स्थिति तब और गंभीर हो गई जब, दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने जमियत उलेमा हिंद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड, और AIMIM की तरफ से दाखिल एक संयुक्त अर्जी को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वक्फ की जायदाद को पोर्टल पर अपलोड करने की तारीख में और इजाफा नहीं किया जा सकता है. इसके लिए अगर फरीक चाहे तो वक्फ ट्रिब्यूनल का रुख कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट के इस स्टैंड के बाद देश का मुस्लिम समाज, खासकर वो लोग जो वक्फ की संपत्ति का संचालन या उसका उपयोग करते हैं, इस चिंता में डूबा हुआ है कि जो जायदाद पोर्टल पर अपलोड नहीं हुआ है, संभवतः सरकार वक्फ की उन संपत्तियों पर कब्ज़ा कर लेगी.
क्या और क्यों है उम्मीद ( UMEED) पोर्टल ?
वक्फ संशोधित कानून 2025 लागू होने के बाद केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय ने एक पोर्टल विकसित किया है, जिसका मकसद है कि देशभर की वक्फ की संपत्तियों को एक प्लेटफार्म पर दर्ज करना. इसी पोर्टल के जरिये वक्फ की नई संपत्तियों को रजिस्ट्रेशन करना, वक्फ की संपत्तियों का पूरा लेखा-जोखा मेंटेन करना.
वक्फ के मुतवल्ली के अकाउंट्स को मेंटेन करने और जमा करने, सालाना ऑडिट रिपोर्ट पब्लिश करना, बोर्ड की प्रोसिडिंग्स और ऑर्डर पब्लिश करना. लीजिंग, ऑडिट और रेवेन्यू को ट्रैकिंग करना. कलेक्टर द्वारा वक्फ का वेरिफिकेशन और सर्वे करना, वक्फ से जुड़े झगड़ों की मॉनिटरिंग करना. पोर्टल का मकसद ट्रांसपेरेंसी बढ़ाना, डेटा में हेरफेर रोकना और स्टेक होल्डर्स की अकाउंटेबिलिटी में सुधार करना है. इसका उद्देश्य ये भी है कि वक्फ बोर्ड और सरकारी एजेंसियों सहित सभी स्टेकहोल्डर्स को रियल-टाइम जानकारी मिले. कोई भी आम आदमी वक्फ की संपत्तियों से जुड़ी कोई जानकारी यहाँ से एक्सेस कर सकता है.
यह वक्फ के मुतवल्ली को ऑनलाइन सारी जानकारी फाइल करने की सुविधा देता है. यह फाइनेंशियल मिसमैनेजमेंट को रोकने का काम करता है. पोर्टल बिना इजाज़त एंट्री को रोकने के लिए "मेकर-चेकर-अप्रूवर" मैकेनिज्म को फॉलो करता है. मेकर मुतवल्ली या स्टेट/UT वक्फ बोर्ड द्वारा ऑथराइज़्ड कोई व्यक्ति होगा; चेकर डिस्ट्रिक्ट लेवल ऑफिसर या स्टेट/UT वक्फ बोर्ड द्वारा ऑथराइज़्ड कोई ऐसा ऑफिसर होगा; और अप्रूवर CEO या स्टेट/UT वक्फ बोर्ड द्वारा ऑथराइज़्ड कोई दूसरा ऑफिसर होगा. यानी इसमें कोई मनचाहा फेरबदल नहीं कर सकता है.
कब ख़त्म हो रही पोर्टल पर सम्पत्ति की जानकरी अपलोअड करने की समय- सीमा
सरकार ने छह माह पहले देशभर के वक्फ बोर्ड और और वक्फ से जुड़े ट्रस्ट के लोगों को वक्फ से जुड़ी सम्पत्ति और उसका पूरा लेखा- जोखा पोर्टल पर दर्ज करने का आदेश दिया गया था. ये आदेश कोई सरकारी आदेश नहीं था, बल्कि ये वक्फ संशोधित कानून का हिस्सा है, जिसमें कहा गया है कि 6 माह की अवधि के अंदर पोर्टल पर सम्पत्ति की जानकारी उपलब्ध करानी होगी. ये समय-सीमा 5 दिसम्बर की रात में खत्म हो रही है.
कहाँ हो रही दिक्कत ?
देशभर से शिकायतें आ रही है कि वक्फ पोर्टल काम नहीं कर रहा है. ये बहुत स्लो चल रहा है. ये बार- बार हैंग कर रहा है. कहीं- कहीं इन्टरनेट भी स्लो है, इस वजह से भी पोर्टल खुल नहीं रहे हैं. शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष अली जैदी ने कहा 6 महीने का समय और बढ़ाया जाए. इसके बाद जो मुतवल्लि सम्पति दर्ज नही कराएगें उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने का प्रावधान किया जाए. जैदी ने कहा उम्मीद पोर्टल पर संपत्तियों को दर्ज करने की तारीख को 1 साल या 6 महीने बढ़ाया जाए. यूपी में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के पास 126000 से ज्यादा संपत्ति है. शिया वक़्फ़ बोर्ड के पास 8000 से ज्यादा संपत्ति है. शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष अली जैदी ने कहा कि शिया वक़्फ़ बोर्ड के पास 8000 से ज्यादा संपत्ति है जिसमें से 3000 से ज्यादा संपत्तियों को अब तक उम्मीद पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर दिया गया है 5000 संपत्ति अभी भी बची है. कमोबेश ये ही हाल देशभर का है. लोग शिकायत कर रहे हैं कि सम्पत्ति अपलोअड नहीं की गई है, अभी और वक़्त चाहिए.
पोर्टल पर संपत्ति दर्ज करने में क्यों हुई देरी ?
वक्फ पोर्टल पर सम्पत्ति दर्ज करने के लिए छह माह का समय दिया गया था, लेकिन इसमें पांच माह ऐसे ही निकल गया. मुस्लिम पक्ष ने संशोधित वक्फ कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. कई मुस्लिम संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस कानून का कड़ा विरोध किया था. उन्हें उम्मीद थी कि कोर्ट इस कानून के लागू होने पर रोक लगा देगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित कानून के कुछ खास प्रावधानों पर रोक लगा दी थी, जिनमें वक्फ बनाने के लिए आवेदक का कम से कम पांच साल तक इस्लाम का पालन करना अनिवार्य होना और संपत्ति विवाद से जुड़ी शक्तियों से संबंधित कुछ प्रावधान शामिल थे. लेकिन कोर्ट ने रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने वाले प्रावधान पर रोक लगाने से इनकार किया था.
देरी की दूसरी वजहें
बुधवार को लखनऊ में शिया सेंट्रल वर्क बोर्ड के दफ्तर में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिले से अपनी वक़्फ़ संपत्ति को उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करने के लिए काफी लोग पहुंचे थे. ज़्यादातर लोगों का कहना है कि उम्मीद पोर्टल की साइट काफी स्लो है. कुछ लोग का कहना है कि उन्हें काफी देर से जानकारी मिली, इसलिए संपत्ति दर्ज करने में दिक्कत हो रही है. कुछ लोगों को यह पता ही नहीं है की साईट में कहां पर जाना है, और कैसे क्या भरना है? कैसे संपत्ति को अपलोड करना है?
एक व्यक्ति मुजम्मिल अब्बास ने कहा, "150 से 200 साल पुरानी मस्जिदों के मुतवल्ली का इंतकाल हो चुका है. ऐसे में दूसरा मुतवल्ली बनाने के लिए हम लोग यहां दौड़ रहे हैं. उसमें टाइम लग रहा है. दफा 37 जो उम्मीद पोर्टल पर लगा है, उसको यहां वक़्फ़ बोर्ड के दफ्तर में दरखास्त दी जाती है और खुद रिपोर्ट मिलने में तीन से चार दिन लग जाते हैं. ऐसे में गवर्नमेंट को समय बढ़ाना चाहिए. अब संपत्ति दर्ज हो पाएगी या नहीं 2 दिन में यह जानकारी नहीं है.
महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड के शाकिर शेख न बताया कि पोर्टल खुल नहीं रहा, कहीं स्लो चल रहा है, कहीं पीडीएफ अपलोड नहीं हो रहा है. कहीं, बिजली नहीं है, कहीं इन्टरनेट नहीं है, कहीं मोबाइल नेटवर्क नहीं है. कहीं कंप्यूटर या फोटो कॉपी मशीन नहीं है. सब कुछ है तो बताने वाला कोई एक्सपर्ट नहीं है. ऐसे में समय सीमा के अंदर इस टास्क को पूरा करना नामुमकिन सा हो गया है. सरकार को इसकी मियाद बढानी चाहिए.
क्यों बढ़ी टेंशन ?
वक्फ प्रापर्टी की जानकरी उम्मीद पोर्टल पर अपलोड करने की मियाद बढ़ाने की मांग सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया. अर्जी दाखिल करने वालों में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड, जमीयत उलमा ए हिंद और और एआइएमआइएम के सद्र असदद्दुीन ओवैसी शामिल थे. ओवैसी शुरू से इस कानून के विरोध में हैं. मुस्लिम पक्ष ने ब्योरा अपलोड करने में आ रही दिक्कतों का जिक्र करते हुए कहा कि यह अपलोड नहीं हो रहा है. लेकिन पीठ ने इन दलीलों को ख़ारिज कर दिया.
इसके बाद केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरन रिजीजू ने भी बयान दिया कि सरकार इस मियाद को नहीं बढ़ाने जा रही है. उन्होंने कहा कि पहले से तय की गई अंतिम तारीख 5 दिसंबर 2025 ही रहेगी. इसके बाद ही लोगों में टेंशन बढ़ गई है.
अल्पसंख्यक मंत्री किरण रिजिजू से मुलाकात
सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने बुधवार को संसद में कहा, " अभी तक सिर्फ 30% ही संपत्तियों का UMEED पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन हो पाया है. उम्मीद पोर्टल की तारीख नहीं बढ़ाई गई . सरकार की नीति और नियत हमें पर पहले से ही हमे शक था. उन्होंने इस मामले में मियाद बढाने की मांग की है. बुधवार को समाजवादी पार्टी के संभल से सांसद जिया उर रहमान बर्क ने भी इस मुद्दे पर अल्पसंख्यक मंत्री किरण रिजिजू से मुलाकात कर समय सीमा बढाने की मांग की है.
क्या जो संपत्ति दर्ज नहीं होगी सरकार का हो जाएगा कब्ज़ा ?
वक्फ से जुड़े लोग और एक आम मुसलमानों की ये चिंता है कि जो सम्पत्ति पोर्टल में दर्ज नहीं होगी क्या वो सरकार की संपत्ति हो जायेगी. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील नेयाज़ अहमद खान कहते हैं, ये एक निराधार डर है. कोई सम्पत्ति सिर्फ एक पोर्टल में दर्ज न करने से किसी दूसरे की कैसे हो जायेगी. हर काम का एक समय सीमा होता है. इसका भी दिया गया है. आगे कोई न कोई रास्ता निकलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वक्फ बोर्ड इसके लिए वक्फ ट्रिब्यूनल का रुख कर सकता है. जब आधी से ज़यादा सम्पत्ति अपलोड ही नहीं हुई तो, इस पोर्टल और पूरी प्रक्रिया का कोई मतलब ही नहीं रह जाता है.
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