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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और वामदल मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं और कांग्रेस अन्य राज्यों की तरह यहां भी छोटे भाई का किरदार निभाती नजर आ रही है. आजतक की एक खबर के मुताबिक वामदल और कांग्रेस के बीच 193 सीटों पर चर्चा हो चुकी है. जिनमें कांग्रेस 92 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि 101 सीटों पर वामदल अपने उम्मीदवारों के उतारेंगे.
पिछले चुनावों पर नजर डालें तो साल 2016 के चुनाव में कांग्रेस और वामदल ने मिलकर लड़े थे और सबसे बेहतरीन प्रदर्शन भी कांग्रेस का ही रहा था. डेटा के मुताबिक कांग्रेस ने 2016 में 294 सीटों में से 92 सीटों पर चुनाव लड़ा था. जिसमें उसे 44 सीटों पर फतह का परचम लहराया था. वहीं अगर वाम दलों की बात करें तो 202 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. जिसमें उन्हें महज़ 32 सीटों पर जीत नसीब हुई थी.
कांग्रेस निभाती आ रही है छोटे भाई का किरदार
बता दें कि कांग्रेस इस वक्त इतनी मजबूर है कि हर राज्य में उसे छोटे भाई का किरदार अदा करना पड़ रहा है. बिहार चुनावों की बात करें तो कांग्रेस ने RJD के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. यहां पर 243 विधानसभा सीटों में कांग्रेस को महज़ 70 सीटे मिली थीं. जिनमें से उसे 19 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. इसके अलावा RJD ने 144 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. जिनमें से उसे 75 सीटों पर फतह हासिल हुई थी.
इसके अलावा उत्तर प्रदेश की बात करें तो यहां भी कांग्रेस ने सूबाई पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव में हिस्सा लिया था. उत्तर प्रदेश की 403 सीटों वाली विधानसभा में से कांग्रेस को महज़ 114 सीटें मिली थीं. बल्कि समजवादी पार्टी 311 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. नतीजों की बात करें तो कांग्रेस ने 114 सीटों में से सिर्फ 7 सीटें और समाजवादा पार्टी ने 311 में से 47 सीटों पर जीत मिली थी.
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