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नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) और वहां के राज्यपाल जगदीप धनखड़ (Governor Jagdeep Dhankad) के बीच रस्साकशी और टकराव जगजाहिर है. दोनों एक दूसरे के अधिकार क्षेत्र में अनुचित हस्तक्षेप का इल्जाम लगाते रहे हैं. अब मामता सरकार ने एक कानून में तब्दीली का प्रस्ताव लाकर जहां राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में कटौती करने का संकेत दिया है वहीं इस फैसले को केंद्र सरकार के लिए भी झटका माना जाएगा.
Today we have taken a decision that all state-run universities will have the CM - and not Governor - as the Chancellor. This will be taken to the Assembly for the Act to be amended: West Bengal Minister Bratya Basu
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— ANI (@ANI) May 26, 2022
विधान सभा में पेश किया जाएगा बिल
ममता बनर्जी की सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि अब बंगाल के विश्वविद्यालयों में राज्यपाल की जगह खुद मुख्यमंत्री चांसलर होंगी. इसका ऐलान पश्चिम बंगाल के मंत्री ब्रत्य बसु ने किया है. पश्चिम बंगाल के मंत्री ब्रत्य बसु ने ऐलान किया कि आज हमने फैसला किया है कि सभी सरकारी यूनिवर्सिटीज में चांसलर की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के पास होगी. इस कानून में संशोधन के लिए विधान सभा में बिल पेश किया जाएगा.
राज्यपाल ने बिना पूछे कर दीं थीं नियुक्तियां
गौरतलब है कि हाल ही में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ पर इल्जाम लगा था कि उन्होंने राज्य सरकार की रजामंदी के बिना राज्य के कई कुलपतियों की नियुक्ति कर दी थी. जिस वजह से राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी. नियमानुसार सभी राज्यों के विश्वविद्यालयों का चांसलर उस राज्य का गवर्नर होता है जो राज्य में कुलपतियों की नियुक्ति करता है. इसमें केंद्र सरकार का भी दखल होता है. ऐसे में राज्यपाल और राज्य सरकारों में टकराव की स्थिति बन जाना स्वाभाविक होता है.
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