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जानिए क्या हैं किसानों से जुड़े तीन बिल और क्यों मुखालिफत कर रही हैं अपोज़ीशन पार्टियां

पंजाब में किसानों का 24 से 26 सिंतबर तक रेल रोको आंदोलन चल रहा है. तो आइए हम आपको बताते हैं कि इन तीनों बिलों में ऐसा क्या है जिसको लेकर ये सब सियासी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं.

फाइल फोटो
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नई दिल्ली: मरकज़ की नरेंद्र मोदी हुकूमत ने पार्लियामेंट में किसानों को लेकर तीन बिल पास कराए हैं. इन बिलों की मुखालिफत में तमाम अपोज़ीश पार्टियां और किसान मुज़ाहिरे कर रहे हैं. यहां तक कि कांग्रेस ने तो मुल्कगीर (देशव्यापी) आंदोलन का ऐलान किया हुआ है. साथ ही पंजाब में किसानों का 24 से 26 सिंतबर तक रेल रोको आंदोलन चल रहा है. तो आइए हम आपको बताते हैं कि इन तीनों बिलों में ऐसा क्या है जिसको लेकर ये सब सियासी हथकंडे अपनाए जा रहे हैं. 

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मरकज़ी हुकूमत ने इस बिल में किसानों का अपनी फसल मुल्क में कहीं बेचने के लिए अज़ाद किया है. साथ ही एक सूबे के अदर दो सूबों के बीच कारोबार बढ़ाने की बात भी कही गई है. इसके अलावा मार्केटिंग मार्केटिंग और ट्रांस्पोर्टिशन पर खर्च कम करने की बात कही गई है. 

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दूसरे बिल में हुकूमत ने कृषि करारों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रोविज़न किया गया है. यह बिल कृषि पैदावारों की बिक्री, फार्म सर्विसेज़, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और एक्सपोर्टर्स के साथ किसानों को जुड़ने के लिए मज़बूत करता है. कांट्रेक्टेड किसानों को क्वॉलिटी वाले बीच की सप्लाई यकीनी करना, तकनीकी मदद और फसल की निगरानी, कर्ज की सहूलत और फसल बीमा की सहूलत मुहैया कराई गई है. 

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तीसरे बिल नमें में अनाज, दाल, तिलहन, खाने वाला तेल, आलू-प्‍याज को ज़रूरी चीज़ों की फहरिस्त से हटाने का प्रोविज़न है. माना जा रहा है कि बिल के प्रोविज़न्स से किसानों को सही कीमत मिल सकेगी क्योंकि बाजार में मुकाबला बढ़ेगा.

ये तीनों बिल अभी राष्ट्रपति के पास है. इन बिलों पर उनके दस्तखत होने बाकी है. राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद ये बिल कानून की शक्ल इख्तियार कर लेंगे. इन बिलों के लेकर मोदी हुकूमत का कहना है कि इन बिलों से किसानों का हालत में सुधार होगा और किसान अब मुल्क में कहीं भी और किसी को भी अपनी तय कीमत में फसल बेच सकेगा. 

क्यों मुखालिफत कर रही हैं अपोज़ीशन पार्टियां
इन बिलों की मुखालिफत सबसे ज्यादा पंजाब और हरियाणा में हो रही है. भाजपा की सहयोगी शिरोमणी पार्टी अकाली दल (शिअद) खुद इन बिलों की मुखालिफत कर रही है. शिअद का कहना है कि ये बिल कानून बने तो वह एनडीए गठबंधन से अलग हो जाएगी. 

दूसरी तरफ कांग्रेस और दूसरी अपोज़ीश पार्टियां भी इस बिल की मुखालिफत में पूरी मजबूती से खड़ी है. बिलों को लेकर कांग्रेस का मोदी हुकूमत पर सबसे बड़ा इल्ज़ाम यह है कि वह मंडी व्यवस्था खत्म कर किसानों को एमएसपी (Minimum Support Price) से महरूम करना चाहती है. 

किसानों को MSP खोने का डर
दरअसल, मरकज़ी और सूबाई हुकूमतें किसानों से MSP की तय कीमतों पर गेहूं और चावल सबसे ज्यादा खरीदती हैं. पंजाब-हरियाणा में गेहूं-चावल खूब होता है. ऐसे में कृषि बिलों के कानून बनने के बाद इन दो राज्यों के किसानों को उनके उत्पाद की खरीद MSP पर न होने का डर सता रहा है. उन्हें यह डर है कि अगर हुकूमत उनका अनाज नहीं खरीदेगी तो फिर वह किसे अपने अनाज बेचेंगे? अभी तो हूकूमत अनाज लेकर उसे निर्यात कर देती है या फिर और जगहों पर बांट देती है लेकिन बाद में किसान परेशान हो जाएंगे. 

पीएम मोदी ने कही यह बात
उन्हें यह भी डर है कि प्राइवेट कंपनियां या बिजनेसमेन एमएसपी की जगह मनमानी कीमतों पर उनकी फसल की खरीद कर सकती हैं. क्योंकि किसानों के पास स्टोरेज का मुनासिब इंतेज़ाम नहीं है तो उन्हें अपनी फसल मजबूर होकर कम दाम पर भी बेचना पड़ सकती है. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार किसानों को यह भरोसा दिला रहे हैं कि एमएसपी खत्म नहीं होगी, न ही हुकूमतें किसानों के फसल खरीदना बंद करेंगी.

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