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क्या हैं किसानों से जुड़े तीनों बिल जो अब बन गए हैं कानून, जानिए आसान ज़बान में

आइए हम आपको बताते हैं कि इन तीनों बिलों में ऐसा क्या है और क्यों किसान मुखालिफत कर रहे हैं

फाइल फोटो
फाइल फोटो

नई दिल्ली: मरकज़ की नरेंद्र मोदी हुकूमत ने पार्लियामेंट में किसानों को लेकर तीन बिल पास कराए हैं. जिनपर राष्ट्रपति ने इतवार को दस्तखत कर दिए हैं और अब यह तीनों बिल कानून बन चुके हैं. इन बिलों की मुखालिफत में तमाम अपोज़ीशन पार्टियां और किसान मुज़ाहिरे कर रहे हैं. साथ ही पंजाब में किसानों रेल रोको आंदोलन किया हुआ है. तो आइए हम आपको बताते हैं कि इन तीनों बिलों में ऐसा क्या है और क्यों किसान मुखालिफत कर रहे हैं. 

पहला बिला
मरकज़ी हुकूमत ने इस बिल में किसानों को अपनी फसल मुल्क में कहीं बेचने के लिए अज़ाद किया है. साथ ही एक सूबे के अंदर दो सूबों के बीच कारोबार बढ़ाने की बात भी कही गई है. इसके अलावा मार्केटिंग और ट्रांस्पोर्टिशन पर भी खर्च कम करने की बात कही गई है. 

दूसरा बिल
इस बिल में हुकूमत ने कृषि करारों पर राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का प्रोविज़न किया गया है. यह बिल कृषि पैदावारों की बिक्री, फार्म सर्विसेज़, कृषि बिजनेस फर्मों, प्रोसेसर्स, थोक विक्रेताओं, बड़े खुदरा विक्रेताओं और एक्सपोर्टर्स के साथ किसानों को जुड़ने के लिए मज़बूत करता है. कांट्रेक्टेड किसानों को क्वॉलिटी वाले बीज की सप्लाई यकीनी करना, तकनीकी मदद और फसल की निगरानी, कर्ज़ की सहूलत और फसल बीमा की सहूलत मुहैया कराई गई है. 

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तीसरा बिल
इस बिल में अनाज, दाल, तिलहन, खाने वाला तेल, आलू-प्‍याज को ज़रूरी चीज़ों की फहरिस्त से हटाने का प्रोविज़न है. माना जा रहा है कि बिल के प्रोविज़न से किसानों को सही कीमत मिल सकेगी क्योंकि बाजार में मुकाबला बढ़ेगा.

यह भी पढ़ें: जानिए क्या है एमएसपी, जिसके लिए किसान और अपोज़ीशन पार्टियां कर रही हैं प्रोटेस्ट

अकाली दल ने तोड़ा गठबंधन
इन बिलों की मुखालिफत सबसे ज्यादा पंजाब और हरियाणा में हो रही है. हालांकि राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद कई और सूबों में प्रोटेस्ट होने लगे हैं. यहां तक कि भाजपा की हिमायती पार्टी शिरोमणी पार्टी अकाली दल (शिअद) ने खुद इसकी मुखालिफत करते NDA से पल्ला झाड़ लिया है. इससे पहले अकाली दल की जानिब से मरकज़ की नरेंद्र मोदी हुकूमत में कैबिनेट मिनिस्टर हरसिमरत कौर ने भी इस्तीफा दे दिया था. 

क्यों प्रोटेस्ट कर रहे हैं किसान
इन बिलों को लेकर किसान और अपोज़ीशन पार्टियों का कहना है कि वह मंडी व्यवस्था खत्म कर किसानों को एमएसपी (Minimum Support Price) से महरूम करना चाहती है. यानी किसानों को डर है कि उन्हें उनकी फसलों पर मिलने वाला एमएसपी खत्म किया जा रहा है. हालांकि मरकज़ी हुकूमत साफ अल्फाज़ में कहा है कि किसानों का एमएसपी पूरी तरह से महफूज़ है. 

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