आपके इन्हीं सवालों को जवाब देने जा रहे हैं कि आखिर हिंदुस्तान का कानून पॉर्न फिल्मों को लेकर क्या कहता है.
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नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी (Shilpa Shetty) के पति राज कुंद्रा (Raj Kundra) पॉर्न स्कैंडल को लेकर कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं. उनकी गिरफ्तारी के बाद से ही देश में पॉर्न फिल्मों को लेकर चर्चा गर्मा गई है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि पॉर्न फिल्मों को लेकर हमारे देश का कानून क्या कहता है. क्या पॉर्न फिल्में देखना गैर कानूनी है? या फिर पॉर्न फिल्में बनाना जायज है? तो आइए आज हम आपके इन्हीं सवालों को जवाब देने जा रहे हैं कि आखिर हिंदुस्तान का कानून पॉर्न फिल्मों को लेकर क्या कहता है.
बंद कमरे में पॉर्न फिल्में देखना कैसा है?
अगर कोई शख्स एक बंद कमरे में अपने लेपटॉप या फिर मोबाइल पर पॉर्न फिल्में देख रहा है तो यह जुर्म नहीं है. हमारे देश की सबसे बड़ी अदालत (Supreme Court) ने पोर्न फिल्मों से संबंधित साल 2015 में मौखिक रूप से कहा था कि एक एडल्ट अपने कमरे गोपनीय तरीके से अगर पोर्न फिल्म देखता है तो वो उसके स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के रूप में आता है. हालांकि आपको यह बता दें कि कानून के तहत चाइल्ड पॉर्नोग्राफी देखना गैर कानूनी है. इसके अलावा अगर आप अश्लील फिल्में शेयर कर रहे हैं और या प्रकाशित कर रहे हैं तो आप एक बहुत बड़ा जुर्म कर रहे हैं.
वेबसाइट से मोबाइल में सेव करना और शेयर करना भी जुर्म
एक खबर के मुताबिक कुछ वेबसाइट्स को छोड़ दें तो हिंदुस्तान में पोर्न वेबसाइट पर पाबंदी है. हालांकि सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद बहुत सी वेबसाइट एडल्ट कंटेट दिखा रही हैं. जबकि हिंदुस्तान में यह लीगल भी नहीं है. इसके अलावा जो वेबसाइट्स दूसरे देशों में रजिस्टर्ड हैं वो भारत के दायरे से बाहर हैं. लेकिन इस तरह के अश्लील कंटेंट को अपने कम्प्यूटप, लैपटॉप और मोबाइल वगैरह में सेव करना और दूसरों को शेयर करना जुर्म है. इसके अलावा भारत में पॉर्न बनाना और बेचना जुर्म है. यह जुर्म आईपीसी की धारा 292 (IPC 292) के तहत आता है.