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Biography of Prophet Muhammad: इस्लाम को फैलाने में पैगंबर मोहम्मद (स.अ) और सहाबाओं ने कई तरह की जद्दोजहद और कुर्बानिया दीं. यहां तक की मक्का वालों ने उन्हें पत्थर तक मारे. इस्लाम के सबसे कट्टर दुश्मन अबू-जहल ने तो एक बार आप (स.अ) का सजदे में सिर कुचलने तक का प्लान बना लिया था. वह पत्थर लेकर चला लेकिन, फिर कुछ ऐसा हो गया कि उसे उतरे हुए मुंह के साथ वापस लौटना पड़ा. आइये जानते हैं पूरा किस्सा
अबू जहल का असली नाम अम्र इब्न हिशाम था. वह कुरैश के सबसे पावरफुल कबीले बनू मखज़ूम से ताल्लुक रखता था. बनू मखजूम के हाथों में मक्का की सबसे ज्यादा प्रॉपर्टी और ताकत थी. अबू जहल और अबू लहब दो आप के सबसे बड़े दुश्मन माने जाते थे.
जब मुसलमानों ने इस्लाम को खुले तौर पर फैलाना शुरू किया तो मक्का वालों ने उन्हें तरह-तरह से परेशान करना शुरू कर दिया. अबू जहल उन परेशान करने वालों में से एक था. जो आपकी सरे आम बेज़्जती करता और तरह-तरह से सताता.
एक दिन वह (अबू जहल) अपने साथियों के साथ बैठा था और उस दिन उसके मन में खुराफात जागी और प्लान बनाया वह एक बड़े पत्थर से आप (स.अ) का सिर उस वक्त कुचल देगा जब आप (स.अ) सजदे में होंगे. उसने अपने साथियों को यहां तक कह दिया था कि अगर वे उसका साथ देते हैं तो सही, नहीं तो वह यह खुद यह काम करेगा.
अबू-जहल ने इस काम को करने के लिए सुबह का दिन तय किया. वह बड़ा पत्थर उठाकर अपने साथियों के साथ खड़ा था और आप हर रोज की तरह मक्का के करीब नमाज अदा करने के लिए आए. आपने रुक्ने यमानी और हजरे असवद के बीच खड़े होकर नमाज अदा करना शुरू कर दी. फिर, जैसे ही आप सजदे में गए तो अबू जहल पत्थर उठा कर आपकी तरफ बढ़ा.
सभी साथी इस नजारे को देख रहे थे. अचानक वह देखते हैं कि अबू जहल उलटे पैर आ रहा है. उसका मुंह उतरा हुआ था और चेहरे का रंग एकदम सफेद था. साथियों ने पूछा कि अहू जहल क्या हुआ? तो बोला कि वहां आग का अलाव है, जाता तो जल जाता. साथियों ने कहा कि हमें तो कुछ नहीं दिख रहा है.
एक साथी को जोश आ गया और उसने पत्थर उठाकर तुरंत आप (स.अ) की तरफ बढ़ना शुरू किया. कुछ कदम चलकर वह भी रुक गया और वापस लौट पड़ा. साथियों ने देखा कि उसका भी चेहरा उतरा हुआ है और आंखें डर के मारे सहमी हुई थीं. यह कोई पहली घटना नहीं थी. इससे पहले कुरैश कई बार बड़ी-बड़ी साज़िशें कर चुके थे और अल्लाह ने आप को हर बार बचाया.