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नई दिल्ली: अयोध्या के धन्नीपुर में बनने वाली मस्जिद का संगे बुनियाद गणतंत्र दिवस के खास मौके पर रखा गया है. जल्द ही मस्जिद के तामीरी काम का भी आगाज़ होने वाला है. अंदाजा है कि मस्जिद ढाई-तीन सालों में बनकर तैयार हो जाएगी. मस्जिद के नाम की बात करें तो महान स्वतंत्रता सेनानी अमदुल्लाह शाह (Ahmedullah Shah) के नाम पर रखने की चर्चा हो रही है. अहमदुल्ला शाह 1857 की क्रांति के योद्धा थे. जिनके नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की पहली जंग में अवध को जीता गया था.
कौन हैं अहमदुल्लाह शाह
अहमदुल्लाह शाह 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ पहले युद्ध का नेतृत्व करने वाले स्वतंत्रता सेनानी थे. उनका जन्म 1787 में हुआ था और वे फैजाबाद के मौलवी के तौर पर मशहूर थे. उन्होंने दिल्ली, मेरठ, पटना, कलकत्ता के अलावा अन्य स्थानों की यात्रा कर लोगों के मन आजादी के बीज बोए थे.
अहमदुल्लाह शाह का परिवार
अहमदुल्ला हरदोई प्रांत में गोपामन के मूल निवासी थे. वे एक सुन्नी मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनके पिता गुलाम हुसैन खान, हैदर अली की सेना में एक सीनियर अधिकारी थे. उन्होंने इंग्लैंड, सोवियत संघ, ईरान, इराक, मक्का और मदीना की यात्रा की और हज भी किया था.
सुनाई गई थी मौत की सज़ा
खबरों के मुताबिक अहमदुल्ला जब एक बार जब पटना में थे तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. मौलवी को ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह और साजिश के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी. हालांकि बाद में सज़ा को आजीवन कारावास में कम कर दिया गया था. जिसके बाद 10 मई 1857 को विद्रोह के विस्फोट के बाद 7 सिपाही जून को पटना पहुंचे. उन्होंने अंग्रेजी अफसरों के बंगलों पर हमले किए. साथ ही शहर और सरकारी खजाने पर भी कब्जा कर लिया. बाद में वे जेल की ओर बढ़े और मौलवी व अन्य कैदियों को आज़ाद कराया.
पेशवा के वंशज के साथ लड़ी जंग
मौलवी अहमदुल्ला शाह धार्मिक एकता व फैजाबाद की गंगा-जमुना संस्कृति की कदर करते थे. 1857 के विद्रोह में, पेशवा के वंशज नाना साहिब और खान बहादुर खान जैसे शाही लोगों ने अहमदुल्ला के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी थी. शाह 5 जून 1858 को शहीद हो गए थे.
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