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नई दिल्ली: सीनियर कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने बुधवार को भाजपा का दामन थाम लिया है. उन्होंने रेल मंत्री पीयुष गोयल की मौजूदगी में दिल्ली में मौजूद भाजपा के दफ्तर में पार्टी की सदस्यता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने गृह मंत्री और पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की थी. बताया जा रहा है कि जितिन प्रसाद कांग्रेस आला कमान से नाराज चल रहे थे और वो कांग्रेस में तवज्जो न मिलने के चलते भाजपा में शामिल हो रहे हैं.
कौन हैं जतिन प्रसाद
जितिन प्रसाद कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे जितेंद्र प्रसाद श (Jitendra Prasad) के बेटे हैं. जिन्होंने पार्टी में कई अहम ओहदों पर अपनी खिदमत दी थीं. जितिन ने 2004 में शाहजहांपुर से पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता था और उन्हें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कयादत वाली UPA सरकार में इस्पात राज्यमंत्री बनाया गया था. इसके बाद उन्होंने 2009 में धौरहरा सीट से जीत दर्ज की. फिर उन्होंने UPA सरकार में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस, सड़क परिवहन और राजमार्ग और मानव, संसाधन विकास राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली.
भाजपा लहर में नहीं चला जितिन का जादू
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले जितिन प्रसाद को 2014 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में तिलहर सीट से हाथ आज़माया लेकिन इसमें भी उन्हें निराशा ही मिली. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी धौरहरा से उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.
G-23 में भी शामिल थे जितिन
बता दें कि जितिन प्रसाद उन 23 नेताओं में भी शामिल थे, जिन्होंने पिछले साल कांग्रेस में आला कमान से नाराजगी को लेकर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी. खत से जुड़े विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की कांग्रेस कमेटी ने प्रस्ताव पारित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जिसे लेकर विवाद भी हुआ था.
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