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नदीम अहमद: हक़ मांगते हो क्यों गुनहगार की तरह, हक़ है तो छीन लो हक़दार की तरह. सन ऑफ़ मल्लाह-मुकेश सहनी की पार्टी विकासशील इंसान पार्टी (VIP) की वेबसाइट पर लिखा ये शेर अपने आप में कई कहानियां बयान करती है. बिहार असेंबली इंतेख़ाबात में एनडीए में सीट बंटवारे के बाद बीजेपी ने अपने कोटे की 121 सीटों में से मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी को 11 सीटें दी हैं. इसके अलावा वीआईपी सद्र मुकेश सहनी को बीजेपी एमएलसी भी बनाएगी. अज़ीम इत्तेहाद छोड़कर एनडीए में शामिल होने वाले मुकेश सहनी की हर तरफ़ चर्चा है क्यूंकि इन्हें अचानक से 11 सीटें मिल गई है जबकि दूसरी जानिब बिहार के साबिक़ सीएम जीतन राम मांझी को जेडीयू न सिर्फ़ 7 सीटों पर समेट दिया है. इस लिहाज से मुकेश सहनी का क़द मांझी से ऊपर देखा जारहा है.
कौन है सन ऑफ़ मल्लाह-मुकेश सहनी?
19 साल की उम्र में मुकेश सहनी घर से भागकर मुंबई की फ़िल्मी दुनिया में क़िस्मत आज़माने के लिए निकल पड़े थे. मुंबई में शुरुआत में मुकेश ने एक सेल्समैन की नौकरी भी की. इसी दौरान मुकेश के दिमाग में फिल्मों, टीवी सीरियल्स और शो के सेट बनाने के बिजनेस का आइडिया आया. मुकेश ने जब इस शोबे में मेहनत की तो किस्मत ने भी उनका साथ दिया. मुकेश के लिए सबसे बड़ा मौका उस वक्त आया जब, नितिन देसाई ने उनको 'देवदास' का सेट बनाने का काम दिया. शुरूआती कामयाबी के बाद उन्होंने 'मुकेश सिनेवर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी भी बनाई. अपनी मेहनत के दम पर मुकेश ने महज कुछ ही वक़्त में खूब नाम और पैसा कमाया.
सियासी सफ़र की शुरुआत
मुकेश सहनी का सियासी सफ़र अभी तक कुछ ख़ास नहीं रहा है. मुंबई में मिली कामियाबी के बाद मुकेश सहनी ने सियासत में क़िस्मत आज़माने के लिए एंट्री मारी. 2013 की एक सुबह बिहार के सभी अख़बारों में एक इश्तेहार ने लोगों को बताया के सियासत में एक नए नौजवान ने एंट्री मार ली है और पहली बार एक ख़ास नाम लोगों के घरों में दस्तक देने लगा, मुकेश सहनी- सन ऑफ़ मल्लाह. ये एक ऐसा नाम था जिसने लोगों की तवज्जो को खींचा गया और ये बताने की कोशिश की गई के बिहार में मल्लाह कम्युनिटी की नुमाइंदगी करने वाले ने दस्तक दे दी है. ट्विटर पर मुकेश सहनी के 8 हज़ार 632 फॉलोवर हैं.
मुकेश ने 2018 में बनाई विकासशील इंसान पार्टी
मुकेश सहनी ने 2019 के लोकसभा इंतेख़ाबात से क़ब्ल ही नवंबर 2018 में अपनी अलग पार्टी की बनाई थी. सियासत में वीआईपी तरीके से एंट्री लेने वाले मुकेश ने अपनी पार्टी का नाम विकासशील इंसान पार्टी रखा. मुकेश की पार्टी का इंतेख़ाबी निशान पानी में तैरती नाव है जो उनके ज़ाती की तस्वीर को भी पेश करता है. 2019 के लोकसभा इंतेख़ाब में मुकेश का नारा हुआ करता था 'माछ भात खाएंगे अज़ीम इत्तेहाद को जिताएंगे'. 2019 में मुकेश सहनी ने खगड़िया लोकसभी सीट अज़ीम इत्तेहाद के साथ किस्मत आजमाई थी लेकिन मोदी लहार में बुरी तरह शिकस्त का सामना करना पड़ा था.
बीजेपी को क्यों ख़ास लगे मुकेश सहनी
बिहार के दरभंगा जिले के सुपौल बाजार के रहने वाले मुकेश ने 2014 के लोकसभा में पीएम मोदी की जमकर तारीफ़ की थी। मुकेश ने अपने तबके में एक ख़ास पहचान बना रखी है. बिहार में इस तबक़े का अबतक कोई बड़ा लीडर नहीं था इसलिए बीजेपी ने इस ऑप्शन का बेहतर तरीक़े से इस्तेमाल कर लिया।
मुकेश सहनी मल्लाह तबके से आते हैं. बिहार में मछुआरों और नाविकों के तबके में आने वाले मल्लाह, सहनी, निषाद, बिंद जैसी पसमांदा समाज की आबादी काफी ज्यादा है (करीब 6 फीसदी है) और रियासत की 10 से 15 लोकसभा सीटों पर ये अहम रोल निभाते हैं.
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