Biography of Prophet Muhammad: हजरत खदीजा के इस्लाम अपनाने के बाद जिस दूसरे शख्स ने इस्लाम कबूल किया वह अली थे. जो आपको नमाज पढ़ता देखकर और कुरान की आयतों को देखकर खूब मुतास्सिर हुए, इसके बाद उन्होंने अपने वालिद से बिना पूछे ही इस्लाम कबूल कर लिया.
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Biography of Prophet Muhammad: मोहम्मद (स.अ) को देखकर उनकी बीवी खदीजा ने इस्लाम अपनाया. इसके बाद इस्लाम अपनाने वालों में अली थे. जिन्हे खुदा के शेर के तौर पर भी जाना जाता है. अली ने मोहम्मद (स.अ) के साथ आगे चलकर कई जंगे लड़ीं और हमेशा आगे रहे. लेकिन, अली मोहम्मद (स.अ) और इस्लाम से कैसे मुतास्सिर हो गए और मुसलमान बन गए? आइये जानते हैं.
अली की परवरिश हज़रत मोहम्मद (स.अ) ने ही की थी. वे आपके साथ ही रहा करते थे. जब अली (रज़ि) ने आपको और खदीजा को नमाज पढ़ते देखा तो बड़े हैरान हुए. अली देख रहे थे कि दोनों साथ में रुकू और सजदे कर रहे हैं. प्यारी-प्यारी आयते पढ़ रहे हैं, जिनमें अच्छी-अच्छी बाते हैं.
वह मन में सोच रहे थे कि आखिर आप (स.अ) ये क्या कर रहे हैं. आज तक आपको ऐसे सजदे करते और ऐसी आयते पढ़ते नहीं देखा था. नमाज़ मुकम्मल हुई तो अली ने पूछा कि भाईजान ये क्या है? मोहम्मद (स.अ) ने जवाब दिया कि ये अल्लाह का दीन है. इसी दीन पर चलने का अल्लाह ने हुक्म दिया है. अल्लाह के जितने रसूल आए, सभी यही दीन लेकर आए.
आप (स.अ) ने आगे फरमाया कि अल्लाह ने मुझे नबी बनाया है, मुझपर अपनी हिदायत उतारी है, ताकि मैं लोगों को अच्छी बातों से वाकिफ कर सकूं. जो लोग भटक चुके हैं उन्हें सही राह पर लाऊं. ये सजदे और रूके उसी अल्लाह को करते हैं.
अली ने आगे कहा कि जिस अल्लाह की इबादत आप कर रहे हैं, क्या मैं भी उस उसकी इबादत कर सकता हूं और इसी तरह नमाज पढ़ सकता हूं. जिस पर अपने फरमाया, हां प्यारे भाई, अल्लाह एक है और उसका कोई शरीक नहीं है, वही इबादत के लायत है और तुम भी उसकी इबादत करो. लात और उज्जा को छोड़ दो, जितने बुत हैं उसे तोड़ दो.
इस पर अली ने कहा कि चलिए मैं इस बारे में अब्बा से पता करता हूं. रात भर अली इस बारे में सोचते रहे और जो आप (स.अ) ने कहा था उसके बारे में सोचते रहे. सुबह होते ही अली (रजि) ने कहा मुझे अब्बा से इजाजत की कोई जरूरत नहीं है और मैं ईमान लाता हूं और आपकी पैरवी की अहद करता हूं. आप बताइये किस तरह रुके और रुकू करूं और अल्लाह का कलाम पढूं.
इसके बाद आप (स.अ) ने उन्हें नमाज सिखा दी. जो आयतें उन पर उतर चुकी थीं वह भी याद करा दीं. अब जब भी आप नमाज पढ़ते तो अली उनके साथ होते. इसके बाज जै़द (रजि) ने इस्लाम कबूल किया वह अली के साथ रहा करते थे. ज़ैद के बाद अबू बक्र ने इस्लाम कबूल किया, जो पैगंबर मोहम्मद (स.अ) पक्के दोस्त थे. यानी पहले इस्लाम अपनाने वाली हजरत खदीजा, फिर अली इसके बाद जैद और अबू बक्र.