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लॉकडाउन में मज़दूरों को अपने सूबों में ले जा रही ट्रेनों का किराया कौन देगा? जानिए बारीकियां

कोरोना का कहर जारी है और लॉकडाउन (Lockdown) भी 17 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है. ऐसे में मरकज़ी हुकूमत ने फैसला लिया है कि वो मज़दूर जो लॉकडाउन की वजह से दूसरे सूबों में फंसे हुए हैं उनको अब घर भेजा जायगा. जिसके लिए रेलवे ने लिए श्रमिक नाम से खास ट्रेने चलाई हैं.

फाइल फोटो...
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नई दिल्ली: कोरोना का कहर जारी है और लॉकडाउन (Lockdown) भी 17 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है. ऐसे में मरकज़ी हुकूमत ने फैसला लिया है कि वो मज़दूर जो लॉकडाउन की वजह से दूसरे सूबों में फंसे हुए हैं उनको अब घर भेजा जायगा. जिसके लिए रेलवे ने लिए श्रमिक नाम से खास ट्रेने चलाई हैं. अब इसमें कुछ सवाल सामने आए हैं कि क्या मजदूरों से रेलवे ने किराया वसूला?

आपको बता दें कि मरकज़ी हुकूमत ने सिर्फ ट्रेन का इंतेज़ाम किया है जबकि मज़दूरों का नाम तय करना सूबाई हुकूमत की जिम्मेदारी है. उसी तरह ट्रेन के अंदर खाने का इंतेज़ाम, सोशल डिस्टेंसिंग और साफ सफाई वगैरा का इंतेज़ाम रेलवे ने किया, जबकि मज़दूरों को स्टेशन तक लाना और फिर उनकी मज़िल तक पहुंचने के बाद के इंतेज़ामात रियासती हुकूमतों को करने हैं.

बात अगर किराए की जाए तो भारतीय रेल ने 85 फीसदी किराया उठाया है. जिसमें ऑपरेटिंग का खर्च भी शामिल है. रियासती हुकूमतों को सिर्फ 15 फीसदी किराया बर्दाश्त करना है और वो भी उनकी जिम्मेदारी तय करने के लिए लिया जा रहा है, ताकि ज़रूरत से ज्यादा लोग या दीगर मसायलका सामना ना करना पड़े. हुकूमत आला सतही ज़राए का कहना है कि अगर ये इंतेज़ामात न होते तो लाखों की तादाद में लोग रेल में बैठने की होड़ में लग जाते और ये खतरनाक होता. 

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हालांकि रेलवे ने यह भी बताया है कि केरल, राजस्थान और महाराष्ट्र से जाने वाले मुसाफिरों से किराया वसूल किया गया है, बाकी सूबों ने मुफ्त में ही मजदूरों को सफर कराया है. केरल, राजस्थान और महाराष्ट्र तीनों ही सूबों में गैर बीजेपी हुकूमत है. रेलवे सीधे किसी भी मुसाफिर को टिकट नहीं दे रहा है, रेलवे सूबों के कहने पर ट्रेनें चला रहा है. लिहाज़ा जो सूबा ट्रेन मांगता है, उसी रियासत को 15 फीसदी किराया भी रेलवे देने को कहता है. 

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