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Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फरनगर में पिछले हफ्ते 40 से ज़्यादा धार्मिक जगहों से लाउडस्पीकर हटा दिए गए हैं. यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के तहत की गई जिसमें तय शोर लिमिट से ज़्यादा आवाज़ वाले लाउडस्पीकर पर रोक लगाई गई थी. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 20 डेसिबल लिमिट से ज़्यादा आवाज़ वाले लाउडस्पीकर फौरन हटा दिए गए.
पुलिस का कहना है कि यह पूरा अभियान कानूनी दायरे में और सही तरीके से चलाया जा रहा है. प्रशासन ने साफ किया है कि यह कार्रवाई किसी खास मजहब के ख़िलाफ नहीं है, बल्कि आवाज प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शहरी और ग्रामीण इलाकों में लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, और जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, वहां फौरन कार्रवाई की जाती है.
जानें हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने क्या कहा?
हिंदू समुदाय के लोगों ने भी इस मुद्दे पर अपना समर्थन दिया है. उनका कहना है कि धार्मिक जगहों पर, चाहे वे किसी भी धर्म के हों, बहुत ज़्यादा तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर नहीं होने चाहिए. उनका मानना है कि तेज आवाज से बुज़ुर्गों, बच्चों और बीमारों को काफ़ी परेशानी होती है. उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को "अच्छा और जरूरी कदम" बताया. इस बीच, मुस्लिम समुदाय के लोगों ने यह भी कहा कि जब सरकार या कोर्ट का कोई ऑर्डर आता है, तो सभी को उसका पालन करना चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि जो लाउडस्पीकर हटाए गए हैं, वे जरूर तेज आवाज़ में बज रहे होंगे.
अधिकारियों ने की ये अपील
मुस्लिम समाज के लोगों ने माना कि तेज आवाज या माइक्रोफ़ोन से गैर-ज़रूरी अनाउंसमेंट से नॉइज पॉल्यूशन बढ़ता है, जिससे आम लोगों का डेली रूटीन डिस्टर्ब होता है. वहीं, लोकल एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि यह कैंपेन आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा. अधिकारियों ने सभी धार्मिक जगहों के मैनेजरों से अपील की है कि वे लीगल एक्शन से बचने के लिए तय नॉइज लिमिट का पालन करें. एडमिनिस्ट्रेशन ने यह भी कहा कि उनका एकमात्र मकसद कानून लागू करना और लोगों को नॉइज पॉल्यूशन से राहत दिलाना है.