Rajasthan News: राजस्थान के एक मुस्लिम परिवार ने दिल छू लेने वाले एक काम को अंजाम दिया है. उन्होंने मानवता की मिसाल पेश करते हुए लगातार 5 महीने तक एक हिरण के बच्चे का लालन-पालन किया. हिरण भी उस परिवार में घुस-मिल गया है. पूरी खबर जानने के लिए नीच स्क्रॉल करें.
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Rajasthan News: राजस्थान के जैसलमेर से एक दिल को भा जाने वाली खबर सामने आई है. यहां एक मुस्लिम परिवार ने इंसानियत की एक अनोखी मिसाल पेश करते हुए, मुसलसल 5 महीने से एक हिरण के बच्चे का पालन- पोषण कर रहा है. इन पांच महीनों में वह हिरण भी उस मुस्लिम परिवार का हिस्सा बन चुका है. हालांकि उस मुस्लिम परिवार ने पांच माह बाद वन विभाग के अफसरों को खबर दी, जिसके बाद अधिकारियों ने उस हिरण को वन्य जीव संरक्षण कानून के तहत दोबारा जंगल में छोड़ दिया.
दरअसल, राजस्थान के जैसलमेर जिला के लाठी वन विभाग क्षेत्र के नया रसला गांव के रहने वाले एक मुस्लिम परिवार ने उस हिरण के बच्चे को पिछले पांच महीने से अपने घर के बच्चे की तरह पाल रहा था. हिरण की मां को बच्चे जन्म देने के कुछ ही दिन बाद जंगली जानवरों ने मार दिया था. उसके बाद जंगल के नजदीक रहने वाले एक मुस्लिन परिवार जमालदीन का 7 साला बेटा और एक पांच साल की बेटी नजीरा ने लगभग 5 महीने तक गाय का दूध पिला कर अपने भाई की तरह पालन-पोषण किया और जिंदा रखा. बता दें कि जमालदीन के परिवार ने उस हिरण के बच्चे का नाम मुस्कान रखा है. वक्त-वक्त पर दूध-पानी देने वाले परिवारजनों से हिरण के बच्चे को इतना लगाव हो गया था कि पूरे दिन वो परिवार के इर्द-गिर्द ही रहने लगा था. थोड़ा दूर चले जाने पर जैसे ही परिवार के सदस्य उसको नाम से पुकारते थे, तो वह दौड़ते हुए उनके पास आ जाता था.
इंसान और जानवरों के बीच इस वजह से बन गया पारिवारिक रिश्ता
वन्यजीव प्रेमी सुमेर सिंह भाटी ने बताया कि इंसान और जानवरों के बीच पारिवारिक रिश्ते की ये बात इसलिए भी खास है कि जंगली जानवरों में हिरण एक ऐसा जानवर है जो इंसानों के पास आना तो दूर, आहट सुनते ही भाग जाता हैं, लेकिन जन्म के करीब 5 दिन बाद से ही हिरण के बच्चे से उसकी मां बिछड़ गई, जिसके बाद नजीर व नजीरा ने उसे पाल कर बड़ा किया है.
आवारा कुत्तों के हमले का डर सता रहा था, इसलिए वापस भेज दिया जंगल
नया रासला गांव निवासी जमालदीन ने बताया कि हिरण का बच्चा इतना चंचल है कि कुछ ही दिनों में वो फैमिलियर हो गया और इंसानों से उसका डर खत्म हो गया. उन्होंने कहा कि बच्चों से लेकर बड़ों तक सबके हाथ से दूध पी लेता था. करीब पांच महीने की देखभाल के बाद वो पूरी तरह से तंदुरुस्त हो गया है. उन्होंने बताया कि अब वह घर से बाहर चला जाता है, जिससे उनको आवारा कुत्तों के हमले का डर सता रहा था, इसको देखते हुए उन्होंने वनविभाग कर्मियों को सूचित कर वन्य जीव प्रेमी सुमेर सिंह भाटी की मौजूदगी में हिरण के बच्चे को वन विभाग कर्मियों को सुपुर्द कर दिया.
उत्तर प्रदेश के अमेठी में आरिफ ने पाला था सारस
गौरतलब है कि इससे पहले साल 2023 में भी उत्तर प्रदेश के अमेठी में भी मोहम्मद आरिफ नाम के एक मुस्लिम नौजवान की भी सारस पक्षी से दोस्ती की खबर खुब चर्चा में था. सारस पक्षी जंगली जानवरों के फहरिस्त में शामिल है. हालांकि वन्य विभाग के अधिकारियों ने वन्य जीव संरक्षण कानून का हवाला दे कर सारस को आरिफ घर से ले गएं, और मेरठ में मौजूद पक्षी विहार में छोड़ दिया. इस घटना के बाद जम कर राजनीति हुई थी. बात दें, सरस पक्षी एक परवासी पक्षी है, जो रूस के ठंडे प्रदेश साइबेरिया से भार के कई सूबे जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश में आ जाते हैं.