Assam polygamy Act: असम में एक से ज्यादा शादी करने वाले पीड़ितों ने कानून पास होने पर खुशी जताई, लेकिन इसे लागू करने पर सवाल उठाए. ह्यूमन राइट्स एडवोकेट साहिब अहमद और रूना रिजवी ने कहा, "असली राहत तभी मिलेगी जब कानून जमीन पर लागू होगा. इंतजार अभी भी जारी है."
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Assam News: असम विधानसभा में बहुविवाह कानून का बिल पास हो गया है और राज्यपाल के साइन के बाद यह कानून बनने वाला है. इसके बाद असम में बहुविवाह से पीड़ित महिलाओं के रिएक्शन सामने आ रहे हैं. ह्यूमन राइट्स काउंसिल से जुड़े एडवोकेट साहिब अहमद ने अपना रिएक्शन देते हुए कहा है कि हम असम के मुख्यमंत्री का दिल से शुक्रिया अदा करते हैं और उनका स्वागत करते हैं. बहुविवाह को लेकर जो कानून बना है, वह बहुत अच्छी बात है, लेकिन इससे पहले भी कई कानून बने हैं.
उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक पर कानून बने हैं, लेकिन जब हम पुलिस स्टेशन जाते हैं, तो कोई फर्क नहीं पड़ता. ट्रिपल तलाक अभी तक जमीन पर लागू नहीं हुआ है. इसी तरह अगर बहुविवाह कानून जमीन पर लागू नहीं हुआ, तो यह ठीक नहीं होगा. हम असम सरकार के मुख्यमंत्री से अपील करते हैं कि इसे जमीन पर लागू करें, तभी पीड़ित महिलाओं को फायदा होगा.
वहीं, एक पीड़ित महिला रूना रिजवी ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि असम के मुख्यमंत्री ने बहुविवाह कानून बनाकर बहुत अच्छा फैसला लिया है, लेकिन अगर इसे ज़मीन पर लागू किया जाए, तभी हमारे लिए अच्छा होगा. हमें बहुत दुख हुआ था, लेकिन कानून बनने के बाद हमें बहुत खुशी हुई. अगर देखा जाए तो एक तरफ मुस्लिम समुदाय इस कानून को लेकर नाराजगी दिखा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बहुविवाह से परेशान महिलाएं इसका स्वागत कर रही हैं.
इस कानून के तहत काजी और पुजारी को हो जाएगी जेल
गौरतलब है कि असम असेंबली ने मंगलवार को "असम प्रोहिबिशन ऑफ़ पॉलीगैमी बिल, 2025" को वॉइस वोट से पास कर दिया. इसके साथ ही राज्य में एक से ज़्यादा शादी करना सभी धर्मों के लिए गैर-कानूनी हो गया है. इसका मतलब है कि यह कानून मुस्लिम कम्युनिटी पर भी बराबर लागू होगा. नए कानून के तहत, पहली बीवी के ज़िंदा रहते हुए दूसरी शादी करने पर सात साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है. पिछली शादी को छिपाकर दूसरी शादी करने पर दस साल तक की सजा हो सकती है. जुर्म दोहराने पर सज़ा दोगुनी हो सकती है. शादी कराने वाले काज़ी, पुजारी या मुखिया को भी सज़ा होगी.
गुवाहाटी से शरीफ उद्दीन अहमद की रिपोर्ट