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Muharram 2026: इस्लाम में 10 मुहर्रम, यानी यौमे आशूरा, को बेहद अहम और बरकत वाला दिन माना जाता है. मजहबी किताबों और इतिहासकारों के मुताबिक, इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं, जिनकी वजह से इसकी खास अहमियत बताई जाती है. इसी वजह से दुनियाभर के मुसलमान मुहर्रम पर खास इबादत करते हैं.
बताया जाता है कि इसी दिन आसमान, जमीन, कलम और हजरत आदम (अलैहिस्सलाम) की रचना हुई थी. इसी दिन हजरत आदम (अलैहिस्सलाम) की तौबा भी कबूल हुई थी. इसके अलावा, हजरत इदरीस (अलैहिस्सलाम) को इसी दिन आसमान पर उठा लिया गया था.
इतिहासकारों के मुताबिक, हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती बड़े तूफान से बचकर जूदी पहाड़ पर इसी दिन ठहरी थी. वहीं, हजरत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को खलीलुल्लाह का दर्जा मिला और उनके लिए आग को ठंडा कर दिया गया था.
इसी दिन हजरत इस्माईल (अलैहिस्सलाम) का जन्म हुआ. हजरत यूसुफ (अलैहिस्सलाम) को जेल से रिहाई मिली और उन्हें मिस्र की हुकूमत सौंपी गई. लंबे अरसे के बाद उनकी अपने पिता हजरत याकूब (अलैहिस्सलाम) से मुलाकात भी इसी दिन हुई थी.
धार्मिक परंपराओं में यह भी बताया जाता है कि इसी दिन हजरत मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनकी कौम बनी इस्राईल को फिरऔन के जुल्म से निजात मिली थी. इसी दिन उन पर तौरात भी नाजिल हुई थी. यही वजह से नबी (स.अ.) ने इस मौके पर रोजा रखने का हुक्म दिया.
इसके अलावा, हजरत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) को बादशाहत मिली, हजरत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) को बीमारी से शिफा मिली और हजरत यूनुस (अलैहिस्सलाम) को मछली के पेट से बाहर निकाला गया. उनकी कौम की तौबा भी इसी दिन कबूल हुई और उन पर से अजाब हटा लिया गया.
इतिहासकारों के मुताबिक, हजरत ईसा (अलैहिस्सलाम) का जन्म भी इसी दिन हुआ और उन्हें दुश्मनों की साजिश से बचाकर आसमान पर उठा लिया गया. यह भी कहा जाता है कि दुनिया में पहली बार अल्लाह की रहमत इसी दिन बरसी थी. इस्लाम से पहले मक्का के कुरैश भी इस दिन को सम्मान देते थे और काबा पर नया गिलाफ चढ़ाते थे.
यौमे आशूरा का एक दुखद पहलू भी है. 61 हिजरी में इसी दिन हजरत इमाम हुसैन (रजियल्लाहु अन्हु) को कर्बला के मैदान में शहीद कर दिया गया था. इस्लाम से जुड़ी कुछ मजहबी किताबों में यह भी जिक्र मिलता है कि कयामत भी इसी दिन कायम होगी.
लेखक: डॉ. मुफ्ती मोहम्मद इरफान आलम कासमी (एडिटर, साप्ताहिक 'आब-ए-हयात', भोपाल, मध्य प्रदेश)