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नई दिल्ली: दिल्ली अक्लियती कमीशल के सद्र ज़फरुल इस्लाम खान (Zafarul Islam Khan) ने जुमा को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में अर्ज़ी दाखिल कर अपने खिलाफ दर्ज गद्दारिए वतन के मामले में पहले ही ज़मानत की गुज़ारिश की है. ज़फरुल इस्लाम की वकील वृंदा ग्रोवर (vrinda grover) ने कहा कि मामले को सुनवाई के लिए लिस्टेड करने की इजाज़त दी गई है.
ज़फरुल इस्लाम ने इस बुनियाद पर ज़मानत की मांग की कि वह अवाम की खिदमत करने वाले हैं और उनकी उम्र 72 साल है, जिन्हें दिल की बीमारी और हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी है. उनके कोविड-19 से मुतास्सिर होने का काफी खतरा है, जो उनकी उम्र के शख्स के लिए खतरनाक हो सकता है. वकील वृंदा ग्रोवर, रत्ना अप्पेनदर और सौतिक बनर्जी के ज़रिए दाखिल की गई अर्ज़ी में कहा गया है, "इन हालात में उन्हें इस हल्के एवं गैर तस्दीक शुदा मामले में फौरी गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई से राहत देने की ज़रूरत है ताकि उनकी आज़ादी की हिफाज़त हो सके. क्योंकि ऐसा करने में नाकाम रहने पर ज़िंदगी के उनके हक पर उल्टा असर पड़ेगा."
अर्ज़ी में पुलिस को हिदायत देने की मांग की गई कि उन्हें गिरफ्तार किए जाने की हालत में उन्हें फौरन ज़मानत पर रिहा किया जाए और उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाए. इसमें यह भी हिदायत देने की मांग की गई कि खान के लैपटॉप और मोबाइल को भी ज़ब्त नहीं किया जाए.
बता दें कि ज़फरुल इस्लाम खान ने गुज़िश्ता 28 अप्रैल को ट्वीटर और फेसबुक पर पोस्ट में लिखा था कि अभी तो हिंदुस्तान के मुसलमानों ने लिंचिंग, फसादात, नफरती मुहिमों की शिकायत अरब ममालिक और मुस्लिम दुनिया से नहीं की है और अगर उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया तो हिंदुस्तान की परेशानियां बढ़ सकती है. इसके अलावा उन्होंने कुवैत को हिंदुस्तानी मुसलमानों के साथ खड़े होने के लिए शुक्रिया भी अदा किया था.
हालांकि 1 मई को ज़फरुल इस्लाम खान ने अपनी इस पोस्ट की सफाई में कहा था ''मैंने अपने मुल्क के खिलाफ किसी भी तंज़ीम या दूसरे मुल्क की हुकूमत से शिकायत नहीं की है. मेरा ऐसा कोई इरादा भी नहीं है. मैं एक मुहिब्बे वतन हूं और मैं हमेशा बैरुने ममालिक में अपने मुल्क के साथ खड़ा रहा हूं."
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