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Zee SalaamZee Salaam मज़हबीवबा के ख़तरों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग के साथ फ़रज़न्दान-ए- तौहीद अदा कर रहे हैं हज-ए-बैतुल्लाह

वबा के ख़तरों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग के साथ फ़रज़न्दान-ए- तौहीद अदा कर रहे हैं हज-ए-बैतुल्लाह

कोरोना वायरस वबा के बीच सऊदी अरब में इस बार 28 जुलाई से हज के सफ़र की शुरुआत हो गई है. वबा के ख़तरों को देखते हुए इस बार सिर्फ़ 10 हजार लोगों को इजाज़त मिली है.

फोटो: ट्वीटर
फोटो: ट्वीटर

सैय्यद अब्बास मेहदी रिज़वी: हज चौदह सदियों पर मुहीत माज़ी व हाल की इस्लामी तारीख़ की एक अज़ीम इबादत है. मसलकों, फ़िरक़ो, मकतबों, मुसल्लों और नज़रियों में बंटी मिल्लते मुसलेमा हज के दौरान मुत्तिहद और एक नज़र आती है. हज इस्लाम के बुनियादी अरकान में से आख़िरी रुक्न है और हर उस मुसलमान मर्द व औरत पर फ़र्ज़ है जो अपने घर के मामूल के इख़राजात से ज़्यादा इतनी माली इस्तेतात रखता हो कि हज के ख़र्च को बर्दाशत कर सके. दुनिया के हर मुसलमान की आख़िरी ख़्वाहिश होती है कि वो अपनी ज़िंदगी में एक बार अल्लाह तअला के घर का दीदार कर ले. इस्लामी कैलेंडर के आख़िरी महीने ज़िलहिज्जा की 8 तारीख़ से 12 तारीख़ को सऊदी अरब के शहर मक्का में वाक़े काबा समेत दीगर माक़ामात पर हज अदा किया जाता.

वबा के दौर में इबादत
कोरोना वायरस वबा के बीच सऊदी अरब में इस बार 28 जुलाई से हज के सफ़र की शुरुआत हो गई है. वबा के ख़तरों को देखते हुए इस बार सिर्फ़ 10 हजार लोगों को इजाज़त मिली है. जबकि साबिक़ा बरसों में 20 लाख से ज्यादा लोग इस इबादते अज़ीम को अंजाम दिया करते थे. इस बार जो लोग हज के लिए सऊदी पहुंचे हैं, उनकी पहले से ही कोरोना वायरस की जांच करा ली गई है. इंतेज़ामिया के ज़राए के मुताबिक़ तक़रीबन 70% आज़मीन सऊदी अरब में रहने वाले ग़ैर मुल्की हैं, जबकि बाकी वहां के शहरी.

ख़ास एहतियात के साथ हज

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- हज मुसाफ़िरों को मास्क पहनना ज़रुरी
सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने की हिदायत
मुसाफ़िरों का दर्जाए हरारत चेक किया जा रहा है
कुछ वक़्त के लिए उन्हें क्वारैंटाइन भी किया गया
काबा को छूना और बोसा लेना मना
मक्का के आस पास हिफ़ाज़त के सख़्त इंतेज़ामात

पहले 1 हज़ार लोगों को ही हज की दावत का दावा किया गया था
हज मामलों की वज़ारत ने शुरू में कहा था कि मुल्क में रहने वाले सिर्फ़ 1,000 लोगों को हज करने की इजाज़त दी जाएगी, लेकिन मुक़ामी मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से कहा जा रहा है कि 10,000 लोगों को हिस्सा लेने की इजाज़त दी गई है

हिंदुस्तान से 2 लाख से ज़्यादा लोगों ने दी थी दरख़्वास्त
2020 में हज के लिए 2 लाख से ज्यादा लोगों ने हज पर जाने की आर्ज़ी दी थी. मार्च तक 1.18 लाख लोग रजिस्टर्ड हुए थे. इसमें से जून के पहले हफ्ते में 16 हजार लोगों से रजिस्ट्रेशन कैंसिल कराया था. वहीं, महरम के बगैर इस साल 2300 से ज्यादा ख़्वातीन हज पर जाने वाली थीं. इन ख़्वातीन को इसी बुनियाद पर 2021 में सफ़र पर भेजा जाएगा.

हज कैसे अदा होता है
हज में तीन बातें फर्ज हैं. अगर ये छूट जाएँ तो हज नहीं होगा. हज का पूरा तरीका यह है कि पहले 'तवाफे वुकूफ' करते हैं. हजरे असवद को चूमते हैं फिर सफा और मरवा दोनों पहाड़ियों के बीच दौड़ते हैं. 8 जिलहिज्जा को फज्र की नमाज़ पढ़कर मिना चल देते हैं. रात को मिना में रहते हैं. 9 जिलहिज्जा को गुस्ल करके अरफात के मैदान की तरफ रवाना होते हैं. वहाँ शाम तक ठहरते हैं. अरफात का मंजर बड़ा ही रुहपरवर होता है. दूर-दूर से आए फ़रज़न्दाने तौहीद का ठाठें मारता हुआ समंदर नज़र आता है. अलग अलग तहज़ीब, सक़ाफ़त, इलाक़े, क़बीले, सरहद, ज़बान, लिबास के लोग तस्बीह के दाने की तरह एक ही धागे में पिरोए हुए नज़र आते हैं. सबकी ज़बान पर सिर्फ़ तलबिया जारी है. अरफात में ज़ोहर और अस्र की नमाज़ एक साथ पढ़ते हैं. सूरज डूबने के बाद मुज्दल्फा की तरफ रवाना हो जाते हैं. वहाँ मगरिब और ईशा की नमाज़ भी एक साथ पढ़ी जाती है. रात में मुज्दल्फा में ही ठहरते हैं. 10 जिल्हज्जा को फज्र की नमाज के बाद मिना की तरफ़ रवाना हो जाते हैं. दोपहर से पहले पहले मिना में पहुँचकर जमरात पर सात बार कंकरियाँ फेंकते हैं. रमीए जमरात (कंकरियाँ मारने) के बाद तल्बिया कहना बंद कर देते हैं. फिर कुर्बानी करके सर के बाल उतरवाते हैं या कतराते हैं और इहराम उतारकर अपने कपड़े पहन लेते हैं. मिना में 12 जिल्हज्जा तक रहते हैं.

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