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मुल्क में दंगो के बीच जिन्ना को अपने सिगार की पड़ी थी, पढ़िए कुछ अनसुने किस्से

क्या आप जानते हैं कि आज़ादी मिलने से कुछ दिन पहले तक हिंदुस्तान में क्या-क्या सिलसिला-ए-वाक्यात हो रहे थे और हिंदुस्तान के बंटवारे वआज़ादी के की वुजूहात क्या कर रही थी?

फाइल फोटो.
फाइल फोटो.

नई दिल्ली: आज से 73 साल पहले हिंदुस्तान को ब्रिटिश हुकूमत से आज़ादी से मिली थी लेकिन दो हिस्सों में भी बंट गया था और इसकी क़ीमत भारत ने पाकिस्तान की शक्ल में अदा करनी पड़ी थी. इसलिए पाकिस्तान में 14 अगस्त को आजादी के दिन के तौर पर मनाया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज़ादी मिलने से कुछ दिन पहले तक हिंदुस्तान में क्या-क्या सिलसिला-ए-वाक्यात हो रहे थे और हिंदुस्तान के बंटवारे वआज़ादी के की वुजूहात क्या कर रही थी? ये किरदार है भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना (Md ali Jinnah) का. 

हिंदुस्तान के आखिरी Viceroy का नाम था Lord Mountbatten.Lord Mountbatten ने ही हिंदुस्तान के टुकड़े किए थे.Lord Mountbatten जवाहर लाल नेहरू को सिद्धांतों पर चलने वाला नेता मानते थे लेकिन उनकी राय में नेहरू के सामने जब कोई मज़बूती से अपनी राय रखता था तो वे फौरन झुक भी जाते थे. जबकि हिंदुस्तान के पहले वज़ीरे दाखिला सरदार वल्लभ भाई पटेल को वो एक समझदार और अपनी बात पर मज़बूती से अड़े रहने वाला नेता मानते थे. मोहम्मद अली जिन्ना के बारे में उनकी राय ये थी कि वो बहुत अड़ियल हैं और उन पर किसी की बात का कोई असर नहीं होता.

जब इन तमाम नेताओं ने हिंदुस्तान के बंटवारे का फ़ैसला कर लिया और ये ख़बर फैलने लगी तो कि साल 1947 के जून महीने में अचानक पाकिस्तान के कराची में अफ़रा-तफ़री मच गई और लोगों ने बैकों में अपने Saving Accounts से 6 करोड़ रुपये निकाल लिए. इसी दौरान दिल्ली के Viceroy House में एक रात चोरी की वारदात हो गई. ये चोरी Viceroy House के उस हिस्से में की गई थी. जहां Lord Mountbatten के फौजी सलाहाकार रहते थे लेकिन चोर कभी पकड़े नहीं जा सके.  Viceroy House को ही आज राष्ट्रपति भवन कहा जाता है. 

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- जिन्ना पाकिस्तान तो बनाना चाहते ही थे लेकिन उनकी ज़िद ने लॉर्ड माउंटबेटन को भी बहुत परेशान कर दिया था. इसी परेशानी के बीच लॉर्ड माउंटबेटन ने अपनी बेटी Patricia को एक खत लिखा. इसमें उन्होंने लिखा कि तुम्हारे वालिद एक ऐसे हालत में फंस गए हैं जिससे बाहर आना बहुत मुश्किल है. उन्होंने लिखा कि मैंने अपने ऐतिमाद की वजह से सबकुछ बर्बाद कर दिया है और मैं इस बात से बहुत मायूस हूं कि इतनी मेहनत करने के बाद भी मैंने जिन्ना को समझने में बहुत बड़ी ग़लती कर दी और अब मैं खुद इस जगह को जल्द से जल्द छोड़ना चाहता हूं.

- इसी बीच मुल्क के हालात बिगड़ने लगे, फ़सादात की नौबत आ गई. रेवाड़ी से 70 हिंदुओं का अगवा कर लिया गया. हिंदुस्तान के नेता इन हालात को लेकर फिक्रमंद थे लेकिन उस वक्त पाकिस्तान के बानी जिन्ना को सिर्फ़ अपने सिगार की फ़िक्र थी. मोहम्मद अली जिन्ना ने देहरादून के किसी यूनुस को खत लिखा और पूछा कि उनके सिगार के Cartons यानी डिब्बे कहां हैं? आप कह सकते हैं कि जब हिंदुस्तान बंटवारे की आग में जल रहा था. तब भी जिन्ना जैसे नेता को सिर्फ़ अपने शौक की पड़ी थी. वो किसी भी तरह से अपने खोए हुए सिगार वापस पाना चाहते थे और अपनी शानो शौकत में कोई कमी नहीं आने देना चाहते थे.

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