अल्लाह का सबसे पसंदीदा दीन इस्लाम, क़ुरान अल्लाह की किताब है, काबा अल्लाह का घर है

मेरे काबे को जबीनों से बसाया किसने, मेरे क़ुरान को सीने से लगाया किसने 

अल्लाह का सबसे पसंदीदा दीन इस्लाम, क़ुरान अल्लाह की किताब है, काबा अल्लाह का घर है

सैयद अब्बास मेहदी / नई दिल्ली : इस्लाम अल्लाह का सबसे पसंदीदा दीन और मज़हब है। क़ुरान शरीफ़ की तीसरी सूरह आले इमरान की 19 आयत इस बात की तस्दीक़ करती है। इस दीन की तब्लीग़ के लिए 1 लाख 24 हज़ार अंबिया इस दुनिया मे आते रहे और अल्लाह के पैग़ाम को दुनिया तक पहुंचाते रहे। आख़िर में मुसलमानों के आख़िरी नबी हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा स.अ. ने इस दीन और मज़हब की तब्लीग़ इस अंदाज़ और शान से फ़रमाई कि इस्लाम क़यामत तक के लिए मामून और महफ़ूज़ हो गया।

पूरी दुनिया में फैले हैं मानने वाले

ईसाइयों के बाद पूरी दुनिया में इस्लाम के मानने वालों का दूसरा मक़ाम है। इसके मानने वालों को मुसलमान, इसके मजहबी मक़ाम को मस्जिद कहा जाता है। मुसलमानों ने इस्लाम की इब्तेदा से ही हिजरत अख़्तियार की लिहाज़ा आज दुनिया के किसी भी कोने में आप जाएंगे तो मुसलमान, मस्जिद ज़रुर मिल जाएगी। अरब के रेगिस्तान से लेकर अफ़्रीक़ा के जंगलों तक, अमेरिका से लेकर यूरोप तक और एशिया की चारो सिम्त में जहां भी जाइएगा मुसलमानों को पाइगा।

मुसलमान कौन

मुसलमान होने के लिए शर्त ये है कि वो इस बात का इक़रार करे कि अल्लाह एक है, वो लाशरीक है उसका कोई शरीक नहीं है,क़ुरान अल्लाह की किताब है, काबा अल्लाह का घर है और नबी मुहम्मद मुस्तफ़ा स.अ. अल्लाह के आख़िरी नबी हैं। उनके बाद अब कोई नबी या रसूल नहीं आएगा।

इस्लाम के पांच रुक्न

तौहीद, नमाज़, रोज़ा, हज और ज़कात ये इस्लाम के पांच अरकान हैं। हर मुसलमान पर ये वाजिब है कि मुसलमान इन पांच अरकान की अदायगी करे। तौहीद यानी अल्लाह एक है उसके सिवा कोई माबूद नहीं, नमाज़ हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है कि वो दिन में पांच बार नमाज़ अदा करें फ़ज्र, ज़ोहर, असर,मग़रिब और इशा के वक़्त । रोज़ा इस्लामी कैलेंडर के 9 महीने रमज़ान के तीस दिनों तक हर सेहतमंद मुसलमान पर फ़र्ज़ है, इस दौरान नमाज़े फ़ज्र से पहले और नमाज़ मग़रिब तक मुसलमान कुछ भी न खाते हैं न पीते हैं। भूखे और प्यासे रहकर इबादत करते हैं। हज हर साहबे इस्तेअत पर ज़िदंगी में एक बार फ़र्ज़, हज ज़िलहिज्जा के महीने में मक्का शरीफ़ में अदा किया जाता है। आख़िरी है ज़कात मुसलमान अपने माल का ढाई फ़ीसद हिस्सा ज़कात के तौर पर देता है जो मुहताजो तंगदस्तों और मुस्तहक़ीन के लिए मुख़्तस होता है

दौरे हाज़िर और मुसलमान

पैग़म्बरे आज़म के विसाल के बाद इस्लाम मसलकों, मुसल्लों, फ़िरक़ो और टुकड़ों में बंट गया। हालांकि इस्लाम के मानने वाले पूरी दुनिया में फैले हुए हैं, लेकिन मुसलमानों की सफ़ों में ज़बरदस्त एख़्तेलाफ़ है। हर मसलक और फ़िरक़ा अपने आप को मुहम्मदी और जन्नती साबित करने के लिए एक दूसरे की दलीलों को रद करता है। सबका अपने मुताबिक़ अपना नज़रिया है, क़ुरान की अपनी अलग तफ़सीर है। ख़ैर ये अगले मज़मून में हम बताएंगे कि मुसलमान कितने फिरक़ो में बंटा है और इसकी वजह क्या है।