Opinion: UAE के प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान ने भारत दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर तारीफ की है. वहीँ दावोस से लूलू मॉल के मलिक युसफ अली ने योगी जी की तारीफ की है. प्रधानमंत्री ने भी अल नाहयान का रेड कारपेट स्वागत किया है. इसके बाद लोग पूछ रहे हैं, मुसलमान तो मुसलमान है चाहे गरीब हो या अमीर, फिर भारतीय मुसलमानों से इतनी नफरत क्यों है?
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संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान सोमवार को अपना दिल्ली दौरा खत्म कर वापस दुबई लौट गए. वहां पहुचकर उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा," PM मोदी से मिलकर खुशी हुई. सस्टेनेबल डेवलपमेंट और इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए कमिटेड, UAE और इंडिया अपने देशों और लोगों के लिए आपसी फ़ायदा हासिल करते हुए फ्यूचर-फ़ोकस्ड सेक्टर्स में प्रोग्रेस को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे."
इसके बदले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी X पर एक पोस्ट में लिखा,"7, लोक कल्याण मार्ग पर अपने भाई, हिज़ हाइनेस शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान की मेज़बानी करके बहुत खुशी हुई, हमने भारत-UAE की बहुआयामी दोस्ती को और मज़बूत करने के मकसद से कई मुद्दों पर बात की".
मोदी के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर के स्पोक्सपर्सन रणधीर जायसवाल ने X पर एक पोस्ट में कहा, "एक सफल दौरा खत्म हुआ! प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन ज़ायद के दौरे से अहम नतीजे निकले और भारत और UAE के बीच बड़ी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप और गहरी हुई".
ये दो देशों की राष्ट्राध्यक्षों की औपचारिक मुलाकात और शिष्टाचार है. अगर चीन के रष्ट्रपति भी भारत दौरे पर आयेंगे तो भी दोनों पक्ष ऐसा ही लिखेगा और कहेगा कि हमें मिलकर बेहद ख़ुशी हुई!
भारत UAE के बीच $100 बिलियन डॉलर का सालाना कारोबार होता है. (UAE) $75 बिलियन का और इन्वेस्ट भारत में करना चाहता है. भारत एक उभरती हुई इकॉनमी है, इसलिए दुनिया भर के अमीर देश और कारोबारी यहाँ इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं. प्रधानमंत्री मोदी भी इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. वो बार- बार खाड़ी देशों का दौरा करते हैं, और वहां से आये मेहमानों का प्रोटोकॉल तोड़कर स्वागत करते हैं.
लेकिन सोमवार को (UAE) के प्रेसिडेंट शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान के वापस जाने के बाद सोशल मीडिया पर एक मीम और सवाल काफी ट्रेंड में रहा कि क्या मोदी सिर्फ अमीर मुसलमानों से प्रेम करते हैं, और उन्हें सम्मान देते हैं, क्यूंकि देशी मुसलमानों की छवि खराब करने, उन्हें नीचा दिखाने और उनके खिलाफ नफरतआमेज़ भाषण देने में वो कभी पीछे नहीं रहते हैं, और न ही ऐसा करने वाले अपनी पार्टी नेताओं के खिलाफ वो कभी कुछ बोलते हैं.
वहीँ, मंगलवार को स्वीटजर्लैंड के दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक फोरम में भारतीय मूल के दुबई के कारोबारी और लुलु ग्रुप इंटरनेशनल के चेयरमैन, यूसुफ अली ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जमकर तारीफ की. यूसुफ अली ने इस मौके पर PM मोदी की शान में भी कसीदे पढ़े.
यूसुफ अली ने कहा, "यूनाइटेड अरब अमीरात और भारत के बीच रिश्ता ऐतिहासिक है, और UAE के प्रेसिडेंट और हमारे प्रधानमंत्री के बीच पर्सनल रिश्ता भी काफी मज़बूत है. प्रधानमंत्री खुद UAE के प्रेसिडेंट को लेने गए थे, और अगर प्रधानमंत्री मोदी UAE आते हैं, तो UAE के प्रेसिडेंट उन्हें लेते हैं. यह पर्सनल रिश्ता और आगे बढ़ेगा."
यूसुफ अली ने आगे कहा, " योगी आदित्यनाथ की डायनामिक लीडरशिप में उत्तर प्रदेश भारत का एक बहुत ज़रूरी राज्य है, और इन्वेस्टमेंट-फ्रेंडली है. वह प्रो-इंडस्ट्रियलिस्ट, प्रो-इंडस्ट्री, प्रो-ट्रेडिंग हैं।.वह मदद कर रहे हैं. बहुत ज़्यादा, और हमारे पास UP में फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट हैं. UP सरकार पूरी मदद कर रही है. लखनऊ में हमारा शॉपिंग मॉल अब बहुत मशहूर है. हमें कुछ लोगों के आने की उम्मीद थी; अब वह संख्या दोगुनी हो गई है.उत्तर प्रदेश इन्वेस्टमेंट के लिए बहुत प्रोफ़ेशनल राज्य है। हम और ज़्यादा इन्वेस्ट करने जा रहे हैं. हम अब नोएडा में एक शॉपिंग मॉल फ़ाइनल कर रहे हैं, ताकि दिल्ली के लोग भी आ सकें." योगी ने यूसुफ अली का ये विडियो अपने x हैंडल पर शेयर भी किया है.
ये यूसुफ अली वो ही हैं जिनके लखनऊ स्थित लूलू मॉल में नमाज़ पढने को लेकर भारी विवाद हुआ था. नमाज़ पढने वालों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई थी, और हिन्दू संघटनों ने विरोध- प्रदर्शन किया था.
भारत में मुसलमानों के खिलाफ बहुसंख्यक हिन्दू समाज के कुछ वर्ग द्वारा खुलेआम नफरत किसी से छिपी नहीं है. हिन्दू संगठनों से लेकर मंत्री, विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक ऐसा कोई मौका नहीं चूकते हैं जब मुसलमानों को नीचा दिखाया जा सके. उन्हें देश का एक अवांछित तत्व बताया जा सके..
एक आम मुसलमान और मुस्लिम समाज क्या बोलेगा, क्या खाएगा, क्या पहनेगा, क्या पढ़ेगा, क्या करेगा, कहाँ जाएगा, किस्से मिलेगा, उससे कौन मिलेगा, कहाँ रहेगा, ये सब वो तय करना चाहते हैं. उसे सीधा करना चाहते हैं! बात- बात पर उसे पाकिस्तान और बांग्लादेश भेजना चाहते हैं. मुगलों, पाकिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमानों की गलतियों की सज़ा वो देश के गरीब मुसलमानों को देना चाहते हैं. उसे देश के लिए बोझ बताते हैं. मुसलामानों की आबादी, उनकी मस्जिद, मदरसे, स्कूल, उनके पहनावे, उनके खान- पान, उनके कुरआन, नमाज़ , हिजाब सबसे उन्हें दिक्कत है! वो चाहते हैं कि मुस्लमान उनके हिसाब से जिए और चलें.
पूरी दुनिया देख रही है कि कैसे कभी गाय के नाम पर तो कभी जय श्रीराम के नाम पर मुसलमान पीट दिए जा रहे हैं. मार दिए जा रहे हैं. नमाज़ पढने पर जेल जा रहे हैं. उनके खिलाफ गोली मारने के सार्वजनिक नारे लगाए जा रहे हैं. कई देशों की एजेंसिया रिपोर्ट कर रही है कि भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ सामूहिक हिंसा बढ़ रही है. देश में असुरक्षा का माहौल बढ़ रहा है, लेकिन इसकी किसे फ़िक्र है?
योगी जी जब मुसलमानों को ललकारते हैं, धमकाते हैं, तो एक अजीब- सी शक्ल बनाते हैं. गुस्से में उनकी गर्दन और सर की नसें उभर जाती है. जबान की तरह चेहरे से भी अंगारे बरसते हैं. जैसे वो सबको भष्म कर देंगे, जबकि उनका हँसता और मुस्कुराता हुआ चेहरा अच्छा है.. क्यूट है! लेकिन जब मुसलमान अमीर हो, रसूखदार हो, ताक़तवर हो, इन्वेस्टर हो तो मोदी और योगी सभी को वो अच्छा लगने लगता है. वो उसे मौका देते हैं. स्वागत करते हैं. कसकर गले लगा लेते हैं. अपनी तरफ पकड़कर भींच लेते हैं.
अमीर मुसलमान मोदी -योगी जी की तारीफ कर रहे हैं, इधर से उनकी तारीफ हो रही है. ये देश के हिन्दुओं और मुसलमानों दोनों के लिए आँखें खोलने वाली बात है. जिन हिन्दुओं को लगता है कि भारत में 1 हज़ार, १० हज़ार मुसलमानों को मार- पीट देने से इस्लाम ख़त्म हो जाएगा. मुसलमान खतम हो जाएगा. मोदी- योगी इस्लाम का खात्मा करेंगे वो होशियार हो जाए! वो आपकी भावनाओं से खेल रहे हैं!
वो मुसलमान भी होशियार हो जाएँ, जिन्हें ये लगता है या होगा कि देश में उनकी स्थिति के लिए देश के बाहर के मुसलमान उनके लिए आवाज़ उठाएंगे! वो व्यापारी मुस्लमान हैं.अपने फायदे का सौदा करते हैं.दूसरे मुस्लिम देशों में थोक भाव में गोली- बम गिरवाते हैं. किसी के सगे नहीं हैं!
मुसलमानों को याद रखना होगा कि सत्ता चाहे दुनिया में किसी की हो,उसका चरित्र एक जैसा ही होता है. पॉवर के आगे जनहित के मुद्दे और जनता की आवाज़ हमेशा नज़रंदाज़ कर दिए जाते हैं या दबा दिए जाते हैं. इस देश में मुसलमानों का अगर कोई शुभचिंतक है, तो वो इस देश के करोड़ों नॉन-पोलिटिकल हिन्दू हैं, जो न मोदी को अवतार मानते हैं न योगी को और जो न मुसलमान को अपना दुश्मन समझते हैं!
नोट: लेखक हुसैन ताबिश सलाम टीवी से जुड़े हैं. यहाँ व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं. संस्थान इससे इत्तेफाक नहीं रखता है.
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