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नदीम अहमद: अंग्रेजों से आज़ादी की लड़ाई में अपना सब कुछ क़ुर्बान कर देने वाले हिंदुस्तान के अज़ीम मुजाहिदे आज़ादी चंद्रशेखर आजाद और बाल गंगाधर तिलक का आज यौमे पैदाइश है. आज ही के दिन यानी 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के मौजूदा अलीराजपुर जिले के भाबरा गांव जो अब चंद्रशेखर आज़ाद नगर के नाम से भी जाना जाता है, में पैदा हुए थे. आज़ाद का उत्तर प्रदेश के काशी से अटूट रिश्ता रहा है. आज़ाद बचपन में ही काशी में संस्कृत की पढ़ाई करने आ गए थे, उन्हें अपनी बहादुरी और हिम्मत की वजह से ही आज़ाद का लक़ब मिला था.
वाराणसी के लहुराबीर इलाके में आज़ाद के नाम पर आजाद पार्क है तो वहीं सेंट्रल जेल में जहां उन्हें कोड़े मारे गए थे, ठीक उसी जगह पर उनका मुजस्समा है. जंगे आज़ादी के दौरान जलियांवाला बाग सानेहा ने मुल्क की अवाम को झकझोर दिया था. महात्मा गांधी ने इस सानेहा की मुखालिफत में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अदम तआवुन की तहरीक शुरू कर दी थी. 1921 में काशी में तलबा का एक ग्रुप गैरमुल्की कपड़ों की दुकान के बाहर एहतजाज कर रहा था. इसी दरमियान पुलिस आई और सभी को लाठियों से पीटने लगी.
उस वक़्त 15 साल के तालिबे इल्म चंद्रशेखर को गुस्सा आया और मौके पर मौजूद एक दरोगा को पत्थर मार दिया. पुलिस ने चंद्रशेखर को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया. मजिस्ट्रेट ने चंद्रशेखर से उनका नाम पूछा तो उन्होंने आजाद बताया. वहीं मां का नाम धरती, वालिद का नाम स्वतंत्रता और घर का नाम जेल बताया था तब मजिस्ट्रेट ने चंद्रशेखर का तेवर देख कर 15 कोड़े मारने की सजा सुनाई थी.
सेंट्रल जेल में बेंत की टिकठी से बांध कर आजाद को जेलर ने कोड़े मारना शुरू किए तो हर कोड़े पर वह भारत माता की जय कहते थे. चंद्रशेखर जेल से बाहर आए तो उनकी बहादुरी और हिम्मत का किस्सा काशी की अवाम की जु़बान पर था. इसके बाद से ही चंद्रशेखर के नाम के साथ आज़ाद जुड़ गया और वो चंद्रशेखर आज़ाद के नाम से जानने लगे.
1922 में चौरीचौरा की वारदात के बाद महात्मा गांधी ने अदम तआवुन की तहरीक वापस ले लिया तो कांग्रेस से आजाद को काफी मायूसी मिली. काकोरी कांड, अंग्रेज अफसर जेपी सांडर्स का क़त्ल और दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम धमाके जैसी वाक़ेयात में अहम किरदार अदा करने वाले आजाद को प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में 27 फरवरी 1931 को शाहदत नसीब हुई थी.
वही दूसरी जानिब आज़ादी की जद्दोजहद के सरबराह, समाजी मुसल्लह, क़ौमी लीडर, हिंदुस्तानी तारीख़, संस्कृत, हिन्दू मज़हब, हिसाब और खगोल विज्ञान के माहिर बाल गंगाधर तिलक की भी आज यौमे पैदाइश है. 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी में पैदा हुए तिलक ने अंग्रेजों के खिलाफ अहम लड़ाई लड़ी. उन्होंने ही कहा था, स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे ले कर रहूंगा. आजादी के परवानों के लिए ये महज़ कुछ लफ्ज़ नहीं थे बल्कि एक जोश, एक जुनून था जिसके ज़रिए लाखों लोगों ने अपनी कुर्बानियां देकर मुल्क को अंग्रेजों से आजादी दिलाई थी.
बाल गंगाधर तिलक को 3 जुलाई 1908 को गद्दारी के इलज़ाम में गिरफ्तार कर उन्हें 6 साल के लिए बर्मा की मंडले जेल भेज दिया गया और साथ ही एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया. जेल में रहने के दौरान इंडियन नेशनल मूवमेंट की शुरुआत की और 400 पन्नों की किताब गीता रहस्य भी लिख डाली. जब वे रिहा हुए तो उन्होंने होम रूल लीग की शुरुआत की और नारा दिया 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा.' एक दिन फिर अचानक ऐसा आया के 1 अगस्त 1920 को मुबंई में उनका इंतेक़ाल हो गया.
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