अब किसी और सलीके से सताए दुनिया...जी बदलने लगा असबाब-ए-परेशानी से

उर्दू शायरी के खज़ाने से मुंतखब किए हुए 10 बेहतरीन

उर्दू शायरी के खज़ाने से मुंतखब किए हुए 10 बेहतरीन

1/10

अंबरीन हसीब अंबर

ambreen haseeb amber

अब किसी और सलीके से सताए दुनिया
जी बदलने लगा असबाब-ए-परेशानी से

2/10

अहमद फराज़

ahmad faraz

अब तेरे ज़िक्र पे हम बात बदल देते हैं
कितनी रग्बत थी तेरे नाम से पहले पहले

3/10

अलीना इतरत

aleena itrat

हिज्र की रात और पूरा चांद
किस कदर है यह अहतिमाम गलत

4/10

रहमान फारिस

rehman faris

सी दिए जाएं मेरे होठ तो ऐ जाने गज़ल
ऐसा करना मेरी आंखों से अदा हो जाना

5/10

रज़ी अख्तर शौक़

razi akhtar shauq

मुझ को पाना है तो फिर मुझ में उतर कर देखो
यूँ किनारे से समुंदर नहीं देखा जाता

6/10

नामालूम

unknown

रुख्सती के तुझे आदाब सिखाने होंगे
यार जाते हुए मुड़-मुड़के नहीं देखते हैं

7/10

अहमद मुश्ताक

ahmad mushtaq

एक लम्हे में बिखर जाता है ताना-बाना
और फिर उम्र गुज़र जाती है यकजाई में

8/10

माहिर-उल क़ादरी

mahirul qadri

इब्तिदा वो थी कि जीने के लिए मरता था मैं
इंतिहा ये है कि मरने की भी हसरत न रही

9/10

यासमीन हमीद

yasmeen hameed

उस इमारत को गिरा दो जो नज़र आती है
मिरे अंदर जो खंडर है उसे तामीर करो

10/10

जावेद अख्तर

Javed Akhtar

ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना हामी भर लेना
बहुत हैं फ़ाएदे इस में मगर अच्छा नहीं लगत