उर्दू शायरी के खज़ाने से मुंतखब किए हुए 10 बेहतरीन
1/10अब किसी और सलीके से सताए दुनिया जी बदलने लगा असबाब-ए-परेशानी से
2/10अब तेरे ज़िक्र पे हम बात बदल देते हैं कितनी रग्बत थी तेरे नाम से पहले पहले
3/10हिज्र की रात और पूरा चांद किस कदर है यह अहतिमाम गलत
4/10सी दिए जाएं मेरे होठ तो ऐ जाने गज़ल ऐसा करना मेरी आंखों से अदा हो जाना
5/10मुझ को पाना है तो फिर मुझ में उतर कर देखो यूँ किनारे से समुंदर नहीं देखा जाता
6/10रुख्सती के तुझे आदाब सिखाने होंगे यार जाते हुए मुड़-मुड़के नहीं देखते हैं
7/10एक लम्हे में बिखर जाता है ताना-बाना और फिर उम्र गुज़र जाती है यकजाई में
8/10इब्तिदा वो थी कि जीने के लिए मरता था मैं इंतिहा ये है कि मरने की भी हसरत न रही
9/10उस इमारत को गिरा दो जो नज़र आती है मिरे अंदर जो खंडर है उसे तामीर करो
10/10ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना हामी भर लेना बहुत हैं फ़ाएदे इस में मगर अच्छा नहीं लगत