मुशायरा : मेरे महबूब कहीं और मिलाकर मुझसे..

हड्डियां बन गईं पिसकर मेरी सूरमा देखो..साथ मेरे जो कुछ भी हुआ क्या मेरे अच्छा है मज़ाक. तेरे अब्बा ने तो गुंडो का सहारा लेकर हम गरीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक डंडे खाए हैं बहुत दिल को लगाकर तुझसे मेरे महबूब कहीं और मिलाकर मुझसे

Feb 13, 2020, 07:30 PM IST

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