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पन्नाः गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय, बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय!!. इस दोहे का मतलब है कि जब गुरू और गोबिंद यानी भगवान जब एक साथ आपके सामने खड़े हों तो पहले किसे प्रणाम करना चाहिए ? जाहिर है कि गुरु के पांव पहले पड़ना चाहिए ताकि गुरु के बताए रास्ते पर चलकर भगवान को भी हासिल कर लिया जाए. 15वीं सदी के कवि और दार्शनिक कबीर दास ने अपने दोहे में गुरु का महत्व बताया था. ऐसे गुरु भले ही आज बहुत कम हैं लेकिन होते जरूर हैं. कम से कम मध्य प्रदेश के एक गुरु के महान कर्मों और बातों को जानकर आप उस गुरु के प्रति सम्मान के भाव से भर जाएंगे.
सेवानिवृत्ति में मिले 40 लाख रुपये गरीब छात्रों को दान कर दिया
मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के सरकारी प्राथमिक विद्यालय के एक शिक्षक ने 39 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति के दिन अपने कर्मचारी भविष्य निधि और ग्रेच्युटी से मिली करीब 40 लाख रुपये की राशि गरीब छात्रों को दान कर (teacher donates retirement benefits worth Rs 40 lakh to poor students)दिया. विजय कुमार चंसौरिया (Vijay Kumar Chansoriya) ने सोमवार को प्राथमिक शाला खदिंया में अपने सेवानिवृत्त के दिन 31 जनवरी को उन्हें सम्मानित करने के लिए सहयोगियों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में इा आशय की घोषणा की.
खुद गरीबी से लड़की शिक्षक बने थे विजय कुमार चंसौरिया
सेवानिवृत्त शिक्षक ने कहा, ‘‘मैंने अपने जीवनकाल में बहुत संघर्ष किया है. मैंने अपना गुजारा एवं पढ़ाई पूरी करने के लिए रिक्शा चलाया और दूध बेचा. मैं 1983 में शिक्षक के पद पर पदस्थ हुआ था. उन्होंने कहा कि मैं 39 साल तक गरीब स्कूली बच्चों के बीच रहा और उन्हें हमेशा ही अपने वेतन से उपहार और कपड़े देता रहा. उपहार पाकर बच्चों के चेहरे की खुशी देखकर मुझे यह प्रेरणा मिली. इन बच्चों की खुशी में ईश्वर दिखते हैं.
पूरे परिवार ने शिक्षक के फैसले का किया सम्मान
चंसौरिया ने कहा कि अपनी पत्नी हमेलता, दो बेटों एवं बेटी की सहमति से मैंने अपने भविष्य निधि और ग्रेच्युटी के सारे पैसे गरीब छात्रों के लिए स्कूल को दान करने का फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि दुनिया में कोई भी दुख को कम नहीं कर सकता, लेकिन हम जो भी अच्छा कर सकते हैं वह करना चाहिए. शिक्षक की बेटी महिमा कहती हैं, ’’पिता जी के फैसले मे ंहम सबकी सहमति है.’’ महिमा की शादी हो चुकी है और उनके दोनों भाई भी रोजगार में हैं.
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