फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है... लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है

Tauseef Alam
Sep 28, 2023

जलील आली
दिल आबाद कहाँ रह पाए उस की याद भुला देने से... कमरा वीराँ हो जाता है इक तस्वीर हटा देने से

दाग़ देहलवी
तुम्हारा दिल मिरे दिल के बराबर हो नहीं सकता... वो शीशा हो नहीं सकता ये पत्थर हो नहीं सकता

जौन एलिया
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी... दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में

बशीर बद्र
हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं.. उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में

जिगर मुरादाबादी
हम ने सीने से लगाया दिल न अपना बन सका... मुस्कुरा कर तुम ने देखा दिल तुम्हारा हो गया

अल्लामा इक़बाल
फ़क़त निगाह से होता है फ़ैसला दिल का... न हो निगाह में शोख़ी तो दिलबरी क्या है

अल्लामा इक़बाल
दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब... क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो

फ़िराक़ गोरखपुरी
मैं हूँ दिल है तन्हाई है... तुम भी होते अच्छा होता

मीर तक़ी मीर
दिल की वीरानी का क्या मज़कूर है... ये नगर सौ मर्तबा लूटा गया

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