तहज़ीब हाफ़ी के 10 खूबसूरत शेर; मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ...

Tauseef Alam
Sep 29, 2023

तहज़ीब हाफ़ी
मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ... पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे

तहज़ीब हाफ़ी
तेरा चुप रहना मिरे ज़ेहन में क्या बैठ गया... इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया

तहज़ीब हाफ़ी
मैं सुख़न में हूँ उस जगह कि जहाँ... साँस लेना भी शाइरी है मुझे

तहज़ीब हाफ़ी
आसमाँ और ज़मीं की वुसअत देख... मैं इधर भी हूँ और उधर भी हूँ

तहज़ीब हाफ़ी
क्या मुझ से भी अज़ीज़ है तुम को दिए की लौ... फिर तो मेरा मज़ार बने और दिया जले

तहज़ीब हाफ़ी
कोई कमरे में आग तापता हो... कोई बारिश में भीगता रह जाए

तहज़ीब हाफ़ी
मुझ पे कितने सानहे गुज़रे पर इन आँखों को क्या... मेरा दुख ये है कि मेरा हम-सफ़र रोता न था

तहज़ीब हाफ़ी
मिरे हाथों से लग कर फूल मिट्टी हो रहे हैं... मिरी आँखों से दरिया देखना सहरा लगेगा

VIEW ALL

Read Next Story