क्या हैं रमजान में ऐतिकाफ बैठने के नियम और कायदे?

Siraj Mahi
Mar 26, 2024

इबादत
'एतिकाफ' रमजान महीने की नफली इबादत है. इसमें इंसान कुछ दिनों के लिए दुनियादारी को छोड़कर दस दिनों के लिए पूरी तरह इबादत में मसरूफ रहता है.

तिलावत ए कुरान
इसमें रोजे और नमाज के साथ नफल नमाज और कुरान की तिलावत करता है. पैगंबर मोहम्मद स. हर रमजान मुस्तैदी के साथ एतिकाफ में बैठा करते थे.

सवाब
एतिकाफ का मकसद ज्यादा से सवाब हासिल करना है. एतिकाफ का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि एतिकाफ करने वाला आदमी मुस्तैदी के साथ 21 से 29 रमजान के बीच शब-ए-कदर की रात को जागता और इबादत करता है.

20 रमजान
ऐतिकाफ का आगाज 20वें रमजान की शाम से शुरू होता है. मगरिब की नमाज के बाद एतिकाफ करने वाला इंसान दुनियादारी से राब्ता तोड़कर घर या मस्जिद में किसी खास जगह पर बैठ जाता है.

ऐतिकाफ की जगह
एतिकाफ में मर्द और औरत दोनों बैठ सकते हैं. औरत और मर्द दोनों को ही मस्जिद में एतिकाफ करने का हुक्म है, लेकिन अगर मस्जिद में औरतों के लिए इंतजाम न हो, और उनकी सुरक्षा को खतरा हो, तो ऐसी सूरत में उन्हें घर पर ही एतिकाफ करना चाहिए.

जरूरत
ऐतिकाफ के दौरान बिना किसी ठोस वजह के एतिकाफ वाली जगह से बाहर नहीं जाना चाहिए. हालांकि, नहाने, पाखाना और पेशाब करने के लिए वह अपनी जगह से निकल सकता है.

सार्वजनिक काम
एतिकाफ में बैठे शख्स के लिए किसी काम से बाजार जाने, किसी मरीज की एयादत करने, किसी मय्यत के जनाजे में हिस्सा लेने या फिर किसी अन्य सार्वजनिक काम में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं होती.

हमबिस्तर
एतिकाफ में बैठा शख्स अपनी बीवी या अपने शौहर से मिल सकता है, लेकिन उसे एक दूसरे से हमबिस्तर होने की इजाजत नहीं होती.

लैलतुल कदर
एतिकाफ का मकसद लैलतुल कदर/ शब-ए-कदर की रात का फायदा हासिल करना होता है. इसलिए एतिकाफ में बैठे शख्स के लिए जरूरी है कि वह उन पांच रातों में भरपूर इबादत करे और अल्लाह को रोजी करे.

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