जानवरों पर किए जुल्म का भी होगा हिसाब, जानवरों के हक पर क्या कहता है इस्लाम?

Siraj Mahi
Oct 30, 2023


इस्लाम में पशुओं की कुरबानी देने की प्रथा और मांस खाना आम है, लेकिन इस्लाम पशुओं के अधिकारों की रक्षा की भी बात कही गई है.


इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) ने पशुओं को लेकर कई अदेश दिए थे.


प्रोफेट मोहम्मद एक बार एक ऊंट के पास से गुजर रहे थे, जिसका पेट भूख से अंदर को धंस गया था. आप (स.) ने फरमाया कि "इस बेजुबान जानवर की दशा और अल्लाह की नाराजगी से बचो."


उन्होंने आगे कहा कि "इसे भूखा न मारो. इसकी सवारी तभी करो, जब ये अच्छी हालत में हो और सेहतमंद हो."


पैगंबर (स.) ने फरमाया कि अगर किसी के पास कोई पालतू जानवर हो तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उसके मालिक की होती है. आखिरत में आल्लाह किसी जानवर पर किये गए ज़ुल्म का भी हिसाब लेगा.


इस्लाम में कहा गया है कि पशुओं के चेहरे पर न मारो. उनके साथ किसी तरह की ज्यादती न करो. उनकी ताकत से ज्यादा उन पर बोझ न डालो.


इस्लाम इस बात पर जोर देकर कहता है कि जानवरों को आपस में न लड़ाओ. मुर्गे, बेटर, ऊंट या भेड़ को आपस में लड़ाना नाजायज है.


इस्लाम में कहा गया है कि चिड़ियों को उनके बच्चे से अलग न करो. किसी भी जानवर को आग से नुकसान न पहुंचाओ.


किसी जानवर या परिंदे को बांधकर उस पर निशाना न साधो. किसी जानदार पर निशानेबाजी का अभ्यास करने वालों पर अल्लाह के रसूल ने लानत भेजा है.

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