'करोगे याद तो हर बात याद आएगी'; बशर नवाज़ के शेर

Siraj Mahi
Sep 27, 2023

कोई यादों से जोड़ ले हम को... हम भी इक टूटता सा रिश्ता हैं

करोगे याद तो हर बात याद आएगी... गुज़रते वक़्त की हर मौज ठहर जाएगी

दे निशानी कोई ऐसी कि सदा याद रहे... ज़ख़्म की बात है क्या ज़ख़्म तो भर जाएँगे

घटती बढ़ती रौशनियों ने मुझे समझा नहीं... मैं किसी पत्थर किसी दीवार का साया नहीं

जाने किन रिश्तों ने मुझ को बाँध रक्खा है कि मैं... मुद्दतों से आँधियों की ज़द में हूँ बिखरा नहीं

रोज़ कहाँ से कोई नया-पन अपने आप में लाएँगे... तुम भी तंग आ जाओगे इक दिन हम भी उक्ता जाएँगे

तुम्हारे रोज़-ओ-शब से अब कोई निस्बत नहीं लेकिन... तुम्हारा 'अक्स हर लम्हे के आईने में मिलता है

कहते कहते कुछ बदल देता है क्यूँ बातों का रुख़... क्यूँ ख़ुद अपने-आप के भी साथ वो सच्चा नहीं

प्यार के बंधन ख़ून के रिश्ते टूट गए ख़्वाबों की तरह... जागती आँखें देख रही थीं क्या क्या कारोबार हुए

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