'एक आदत सी बन गई है तू', दुष्यंत कुमार के चुनिंदा शेर

Siraj Mahi
Sep 03, 2023

दुष्यंत कुमार
एक आदत सी बन गई है तू... और आदत कभी नहीं जाती

दुष्यंत कुमार
ज़िंदगी जब अज़ाब होती है... आशिक़ी कामयाब होती है

दुष्यंत कुमार
तू किसी रेल सी गुज़रती है... मैं किसी पुल सा थरथराता हूँ

दुष्यंत कुमार
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही... हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए

दुष्यंत कुमार
कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता... एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो

दुष्यंत कुमार
कहाँ तो तय था चराग़ाँ हर एक घर के लिए... कहाँ चराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए

दुष्यंत कुमार
लहू-लुहान नज़ारों का ज़िक्र आया तो... शरीफ़ लोग उठे दूर जा के बैठ गए

दुष्यंत कुमार
सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना मिरा मक़्सद नहीं... मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए

दुष्यंत कुमार
ये सोच कर कि दरख़्तों में छाँव होती है... यहाँ बबूल के साए में आ के बैठ गए

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