'भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ', दुष्यंत कुमार की गजल

Siraj Mahi
Sep 16, 2023

भूक है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ... आज-कल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुद्दआ

मौत ने तो धर-दबोचा एक चीते की तरह... ज़िंदगी ने जब छुआ तब फ़ासला रख कर छुआ

गिड़गिड़ाने का यहाँ कोई असर होता नहीं... पेट भर कर गालियाँ दो आह भर कर बद-दुआ'

क्या वजह है प्यास ज़्यादा तेज़ लगती है यहाँ... लोग कहते हैं कि पहले इस जगह पर था कुआँ

आप दस्ताने पहन कर छू रहे हैं आग को... आप के भी ख़ून का रंग हो गया है साँवला

इस शहर में वो कोई बारात हो या वारदात... अब किसी भी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियाँ

कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता... एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही... हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए

ज़िंदगी जब अज़ाब होती है... आशिक़ी कामयाब होती है

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