परिवार के लिए कमाई करना है इबादत, कारोबार पर क्या कहता है इस्लाम?

Siraj Mahi
Oct 29, 2023


इस्लाम में कारोबार करने को बेहतर बताया गया है. अगर हलाल तरीके से कमाते हैं, तो अच्छा खाना और अच्छा पहनने में कोई बुराई नहीं है.


इस्लाम में बताया गया है कि देने वाला हाथ लेने वाले हाथ से बेहतर होता है. इसका मतलब यह है कि आप कमाई करके लोगों की मदद करने वाले बनिए.


इस्लाम में कमाई के बारे कहा गया है कि जायज तरीके से माल कमाओ. अगर आप गरीब या मिस्कीन रहोगे तो आपके ईमान से सौदा किया जा सकता है.


इल्लाम में जिक्र है कि अगर आपके पास माल और दौलत नहीं होगी, तो आप किसी के पास मोहताज बनकर जाएंगे, वह आपसे गलत काम करवा सकता है.


इस्लाम में बताया गया है कि अगर कोई शख्स अपने छोटे बच्चों की परवरिश के लिए दौड़ धूप कर रहा है, तो यह कोशिश अल्लाह की राह में शुमार की जाएगी.


अगर कोई शख्स अपने बूढ़े मां-बाप की परवरिश के लिए कोशिश कर रहा है, तो यह भी अल्लाह के लिए किया गया काम समझा जाएगा.


अगर कोई सख्स अपने निजी काम के लिए दौड़-धूप कर रहा है और मकसद यह है कि लोगों के सामने हाथ न फैलाना पड़े, तो यह भी अल्लाह के लिए किया गया काम समझा जाएगा.


अगर कोई शख्स लोगों पर आपने माल-दौलत की बरतरी जताने और लोगों के सामने अपनी खुशहाली की नुमाइश करने के लिए भाग गौड़ कर रहा है, तो उसकी यह सारी कोशिश और मेहनत शैतान की राह में शुमार होगी.


इस्लाम में नीयत बहुत मायने रखती है. अच्छी नीयत पूरी जिंदगी और उसमें किए गए सारे काम को इबादत बना देती है, जबकि बुरी नीयत अच्छे कामों को भी गुनाह बना देती है.

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