'और कुछ देर सितारो ठहरो'; एहसान दानिश के चुनिंदा शेर

Siraj Mahi
Sep 21, 2023

मरने वाले फ़ना भी पर्दा है... उठ सके गर तो ये हिजाब उठा

ख़ाक से सैंकड़ों उगे ख़ुर्शीद... है अंधेरा मगर चराग़-तले

ऐसे अंजान बने बैठे हो... तुम को कुछ भी न पता हो जैसे

लोग यूँ देख के हँस देते हैं... तू मुझे भूल गया हो जैसे

और कुछ देर सितारो ठहरो... उस का व'अदा है ज़रूर आएगा

न जाने मोहब्बत का अंजाम क्या है... मैं अब हर तसल्ली से घबरा रहा हूँ

हाँ आप को देखा था मोहब्बत से हमीं ने... जी सारे ज़माने के गुनहगार हमीं थे

जो दे रहे हो ज़मीं को वही ज़मीं देगी... बबूल बोए तो कैसे गुलाब निकलेगा

आज उस ने हँस के यूँ पूछा मिज़ाज... उम्र भर के रंज-ओ-ग़म याद आ गए

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