'उस को जाने दे अगर जाता है '; फ़ैसल अजमी के शेर

Siraj Mahi
Apr 07, 2024


उस को जाने दे अगर जाता है... ज़हर कम हो तो उतर जाता है


चंद ख़ुशियों को बहम करने में... आदमी कितना बिखर जाता है


चंद ख़ुशियों को बहम करने में... आदमी कितना बिखर जाता है


हर्फ़ अपने ही मआनी की तरह होता है... प्यास का ज़ाइक़ा पानी की तरह होता है


कभी देखा ही नहीं उस ने परेशाँ मुझ को... मैं कि रहता हूँ सदा अपनी निगहबानी में


आवाज़ दे रहा था कोई मुझ को ख़्वाब में... लेकिन ख़बर नहीं कि बुलाया कहाँ गया


मैं सो गया तो कोई नींद से उठा मुझ में... फिर अपने हाथ में सब इंतिज़ाम उस ने लिया


आज फिर आईना देखा है कई साल के बाद... कहीं इस बार भी उजलत तो नहीं की गई है


मैं ज़ख़्म खा के गिरा था कि थाम उस ने लिया... मुआफ़ कर के मुझे इंतिक़ाम उस ने लिया

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