मुनव्वर राना
ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा

Siraj Mahi
Jun 18, 2023

साजिद जावेद साजिद
घर की इस बार मुकम्मल मैं तलाशी लूँगा ग़म छुपा कर मिरे माँ बाप कहाँ रखते थे

अब्बास ताबिश
मुद्दत के बाद ख़्वाब में आया था मेरा बाप और उस ने मुझ से इतना कहा ख़ुश रहा करो

मुईन शादाब
वो वक़्त और थे कि बुज़ुर्गों की क़द्र थी अब एक बूढ़ा बाप भरे घर पे बार है

मोहम्मद यूसुफ़ पापा
जब भी वालिद की जफ़ा याद आई अपने दादा की ख़ता याद आई

मेराज फ़ैज़ाबादी
हमें पढ़ाओ न रिश्तों की कोई और किताब पढ़ी है बाप के चेहरे की झुर्रियाँ हम ने

ख़ालिद महमूद
बच्चे मेरी उँगली थामे धीरे-धीरे चलते थे फिर वो आगे दौड़ गए मैं तन्हा पीछे छूट गया

रईस फ़रोग़
मेरा भी एक बाप था अच्छा सा एक बाप वो जिस जगह पहुँच के मरा था वहीं हूँ मैं

अफ़ज़ल ख़ान
देर से आने पर वो ख़फ़ा था आख़िर मान गया आज मैं अपने बाप से मिलने क़ब्रिस्तान गया

इफ़्तिख़ार आरिफ़
बेटियाँ बाप की आँखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं और कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं

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