'रोने को तो ज़िंदगी पड़ी है'; फिराक गोरखपुरी के सबसे अच्छे शेर

Siraj Mahi
Sep 04, 2023

आज बहुत उदास हूँ... यूँ कोई ख़ास ग़म नहीं

मैं हूँ दिल है तन्हाई है... तुम भी होते अच्छा होता

कोई समझे तो एक बात कहूँ... इश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं

जो उन मासूम आँखों ने दिए थे... वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ

तेरे आने की क्या उमीद मगर... कैसे कह दूँ कि इंतिज़ार नहीं

ज़िंदगी क्या है आज इसे ऐ दोस्त... सोच लें और उदास हो जाएँ

कोई आया न आएगा लेकिन... क्या करें गर न इंतिज़ार करें

रोने को तो ज़िंदगी पड़ी है... कुछ तेरे सितम पे मुस्कुरा लें

कौन ये ले रहा है अंगड़ाई... आसमानों को नींद आती है

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