आइना
आइना देख कर तसल्ली हुई हम को इस घर में जानता है कोई

Siraj Mahi
Jun 04, 2023

आंसू
शाम से आँख में नमी सी है आज फिर आप की कमी सी है

वक्त
वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है

आंख
जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ उस ने सदियों की जुदाई दी है

इंतिजार
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

रास्ता
हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया

परछाई
अपने साए से चौंक जाते हैं उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा

दोस्त
जब दोस्ती होती है तो दोस्ती होती है और दोस्ती में कोई एहसान नहीं होता

कांच
काँच के पार तिरे हाथ नज़र आते हैं काश ख़ुशबू की तरह रंग हिना का होता

आग
आग में क्या क्या जला है शब भर कितनी ख़ुश-रंग दिखाई दी है

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