आइना देख कर तसल्ली हुई, 'गुलजार' की 9 चुनिंदा शेर

Tauseef Alam
Sep 15, 2023

गुलजार
आइना देख कर तसल्ली हुई... हम को इस घर में जानता है कोई

गुलजार
शाम से आँख में नमी सी है... आज फिर आप की कमी सी है

गुलजार
ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा.. क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

गुलजार
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़... किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

गुलजार
वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर ... आदत इस की भी आदमी सी है

गुलजार
कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ... उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की

गुलजार
जिस की आँखों में कटी थीं सदियाँ... उस ने सदियों की जुदाई दी है

गुलजार
कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है... ज़िंदगी एक नज़्म लगती है

गुलजार
हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में... रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया

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